पंडरिया: ‘लक्ष्य’ कोचिंग सेंटर में निःशुल्क कोचिंग
पंडरिया । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का पंडरिया ब्लॉक इन दिनों ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है. यहां संचालित ‘लक्ष्य’ निःशुल्क कोचिंग संस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है. इस संस्थान के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान छात्र बिना किसी आर्थिक बोझ के सीजीपीएससी (CGPSC), नीट (NEET) और अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.
आधुनिक डिजिटल क्लासरूम, अनुभवी शिक्षकों और नियमित टेस्ट सीरीज की मदद से युवाओं को उच्च स्तरीय शिक्षा मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है.
इस अनूठी पहल की शुरुआत पंडरिया की भाजपा विधायक भावना बोहरा द्वारा की गई है. विधायक बोहरा के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने महसूस किया था कि क्षेत्र के बड़े हिस्से में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन बड़े शहरों (जैसे रायपुर, बिलासपुर या भिलाई) में जाकर पढ़ाई करने का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण कई युवा अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देते थे.
इसी समस्या को दूर करने के लिए ‘लक्ष्य’ की नींव रखी गई, जहां वर्तमान में 100 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं और कई युवाओं ने सफलता भी हासिल की है. गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यहां शिक्षकों का चयन लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और डेमो क्लास के कड़े मानदंडों के बाद किया जाता है.
स्थानीय स्तर पर इस सुविधा के मिलने से खासकर ग्रामीण छात्राओं और गृहणियों को सबसे बड़ा सहारा मिला है. पंडरिया की रहने वाली पल्लवी पाठक बताती हैं कि पारिवारिक और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए बाहर जाकर तैयारी करना नामुमकिन था, लेकिन इस केंद्र की वजह से वे घर संभालते हुए सीजीपीएससी की तैयारी कर पा रही हैं.
वहीं, किशुंगढ़ की भगवती चंद्राकर और डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना देख रही अंजलि तिवारी जैसी छात्राओं का कहना है कि इस संस्थान ने उन पर से कोचिंग फीस के अलावा रहने, खाने और कमरे के किराये के रूप में लगने वाले करीब 2 से 2.5 लाख रुपये का भारी-भरकम आर्थिक बोझ हटा दिया है.
पंडरिया को शिक्षा का मजबूत हब बनाने की दिशा में हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा क्षेत्र को ‘नालंदा कैंपस’ लाइब्रेरी और अध्ययन परिसर की सौगात भी दी गई है, जिसे विधायक भावना बोहरा ने छात्रों के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया है.
संस्थान के शिक्षक ताराचंद पटेल कहते हैं कि जब ग्रामीण इलाकों के बच्चे प्रशासनिक अधिकारी या डॉक्टर बनेंगे, तो इसका सकारात्मक असर सिर्फ उनके परिवार पर नहीं, बल्कि पूरे समाज और क्षेत्र के विकास पर दिखेगा.