पाक: खैबर पख्तूनख्वा में फिदायीन हमला, 12 की मौत और 30 घायल
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान जिले में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ है. दराजिंदा इलाके के अमान मेला के पास स्थित एक पुलिस जांच चौकी पर विस्फोटकों से लदी गाड़ी टकराने से हुए आत्मघाती धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 30 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.
मृतकों और घायलों में मुख्य रूप से पुलिस कर्मी, सीमा शुल्क (कस्टम) अधिकारी, वन विभाग के कर्मचारी और आम नागरिक शामिल हैं. स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू 1122 की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
चश्मदीदों और पुलिस रिपोर्ट्स के अनुसार, फिदायीन हमले से ठीक पहले हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी भी की थी. डेरा इस्माइल खान जिला पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की सीमाओं के संगम पर स्थित होने के कारण व्यापारिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यहां तस्करी रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ सीमा शुल्क अधिकारी भी बड़ी संख्या में तैनात रहते हैं.
हालांकि किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी तुरंत नहीं ली है, लेकिन प्राथमिक संदेह पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) पर जताया जा रहा है, जो हाल के महीनों में इस क्षेत्र में लगातार हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है.
यह क्षेत्र दक्षिण वजीरिस्तान के पास स्थित है, जो बीते एक दशक से ज्यादा समय से चरमपंथी गतिविधियों का गढ़ रहा है और जहां पाकिस्तानी सेना कई बड़े सैन्य अभियान चला चुकी है. पाकिस्तान में हालिया वर्षों में आतंकी हमलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके पीछे मुख्यतः टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे प्रतिबंधित समूहों का हाथ रहा है.
पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि टीटीपी के आतंकवादी अफगान सरजमीं का इस्तेमाल कर रहे हैं, हालांकि काबुल में काबिज अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है.
यह आत्मघाती हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर तनाव चरम पर है. हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई झड़प में कई अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए थे. दोनों देशों के बीच जारी इस सैन्य तनाव और सीमा पार अभियानों के कारण चीन, तुर्की, कतर और सऊदी अरब द्वारा कराए जा रहे शांति प्रयासों को भी बड़ा झटका लगा है.
गौरतलब है कि, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), जिसे आम तौर पर पाकिस्तान तालिबान के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी कबायली इलाकों (संघशासित कबीले क्षेत्र यानी FATA) में सक्रिय एक कुख्यात और प्रतिबंधित सशस्त्र चरमपंथी संगठन है. इसकी स्थापना आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2007 में बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में हुई थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में शरिया आधारित सख्त इस्लामी शासन स्थापित करना और पाकिस्तानी राज्य तंत्र तथा सेना के खिलाफ युद्ध छेड़ना था.
यद्यपि टीटीपी और अफगानिस्तान के अफगान तालिबान की विचारधारा समान है और दोनों एक-दूसरे के निकट सहयोगी हैं, लेकिन टीटीपी एक स्वतंत्र संरचना के रूप में काम करता है जिसका मुख्य लक्ष्य पाकिस्तानी राज्य को निशाना बनाना है.
संगठन की कमान फिलहाल मौलाना फजलुल्लाह और हकीमुल्लाह महसूद जैसे पूर्व प्रमुखों की मौत के बाद मुफ्ती नूर वली महसूद के हाथों में है, जो इसका केंद्रीय अमीर (प्रमुख) है. टीटीपी का कोई औपचारिक या सार्वजनिक घोषित मुख्यालय नहीं है, लेकिन यह मुख्य रूप से पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा के दुर्गम पहाड़ी इलाकों और अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों (जैसे कुनार, नंगरहार और खोस्त) में बने अपने सुरक्षित ठिकानों व गुप्त पनाहगाहों से अपनी गतिविधियों का संचालन करता है.
पाकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि टीटीपी को सीमा पार अफगान तालिबान का सीधा और परोक्ष समर्थन व पनाह मिलती है, हालांकि काबुल की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है. इसके अलावा, टीटीपी को अल-कायदा जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों का भी वैचारिक और रणनीतिक सहयोग प्राप्त रहा है.
अपने गठन के बाद से टीटीपी पाकिस्तान में कई सबसे विनाशकारी और घातक हमलों को अंजाम दे चुका है. इसकी प्रमुख वारदातों में वर्ष 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुआ भीषण हमला शामिल है, जिसमें 130 से अधिक मासूम स्कूली बच्चों सहित 149 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.
इसके अलावा, 2009 में रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) पर हमला, 2011 में कराची के मेहरान नौसेना बेस पर धावा, 2012 में नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई पर जानलेवा हमला, और 2016 में चारसद्दा के बाचा खान विश्वविद्यालय में गोलीबारी जैसी घटनाएं शामिल हैं. हाल के वर्षों में टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पुलिस चौकियों, सैन्य काफिलों, कस्टम अधिकारियों और सुरक्षा बलों पर अनगिनत आत्मघाती और आईईडी (IED) हमलों को अंजाम दिया है.