ओवैसी ने गुजरात के नए विवाह नियम को बताया निजता का उल्लंघन
नई दिल्ली । डेस्क: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात सरकार द्वारा विवाह के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने के कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है. ओवैसी ने इस संशोधन को नागरिकों के 'निजता के अधिकार' के खिलाफ बताते हुए कहा कि 'लव जिहाद' रोकने के नाम पर बनाया गया यह नियम बालिगों की स्वतंत्रता पर प्रहार है.
उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि यह व्यक्तिगत अधिकारों में राज्य का अनावश्यक हस्तक्षेप है.
यह प्रतिक्रिया गुजरात सरकार द्वारा 'गुजरात विवाह पंजीकरण अधिनियम' में प्रस्तावित उन संशोधनों के बाद आई है, जिनमें अब दूल्हा-दुल्हन को विवाह से पहले अपने माता-पिता की आधिकारिक मंजूरी लेना आवश्यक कर दिया गया है.
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब जोड़ों को विवाह पंजीकरण के समय यह घोषणा करनी होगी कि उन्हें अपने माता-पिता की सहमति प्राप्त है और इसके प्रमाण के रूप में माता-पिता के आधार विवरण और पते जमा करने होंगे.
सहायक रजिस्ट्रार इन दस्तावेजों की जांच करने के बाद 10 दिनों के भीतर माता-पिता को सूचित करेंगे और पूरी प्रक्रिया संतोषजनक पाए जाने पर ही 30 दिनों के भीतर विवाह संपन्न कराया जाएगा.
राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार ऐसी प्रथाओं के सामने मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती जो लड़कियों को निशाना बना रही हैं और समाज को नुकसान पहुँचा रही हैं. सरकार का मुख्य उद्देश्य भागकर की जाने वाली शादियों और 'लव जिहाद' जैसी स्थितियों पर लगाम लगाना है.