पूर्व Cong MLA का चुनाव रद्द होने पर वेतन वापसी का आदेश
चेन्नई । डेस्क: तमिलनाडु से जुड़ा एक अनोखा कानूनी मामला इन दिनों चर्चा में है, जिसमें एक पूर्व विधायक को अपनी पांच साल की पूरी सैलरी और भत्ते लौटाने का आदेश दिया गया. यह मामला कांग्रेस के पूर्व विधायक पी. वेलदुरई से संबंधित है, जिन्होंने 2006 में तिरुनेलवेली जिले के चेरनमहादेवी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीता था.
हालांकि, उनकी जीत को एआईएडीएमके के प्रतिद्वंद्वी पी.एच. मनोज पांडियन ने इस आधार पर मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी कि वेलदुरई के पास नामांकन दाखिल करते समय सरकारी ठेके थे, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए के तहत अयोग्यता का आधार है.
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अप्रैल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने वेलदुरई के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया. तब तक वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे.
इसके बाद, अगस्त 2011 में तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय ने उन्हें एक नोटिस जारी कर 21.58 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया. इस राशि में उनका वेतन, भत्ते और सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए 500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना भी शामिल था.
वेलदुरई ने इस वसूली को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी और तर्क दिया कि उन्होंने 'नेक नीयती' से जनता की सेवा की है और उनके द्वारा किए गए कार्यों को पूर्वव्यापी प्रभाव से वापस नहीं लिया जा सकता.
फरवरी 2019 में, न्यायमूर्ति वी. पार्थिबन ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए वसूली की कार्रवाई को सही ठहराया.
अदालत ने टिप्पणी की कि एक विधायक कोई कर्मचारी नहीं है और यदि उसका चुनाव ही अवैध पाया जाता है, तो प्राप्त की गई राशि 'अनुचित संवर्धन' (Unjust Enrichment) की श्रेणी में आती है.
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जब किसी का नामांकन ही अवैध था, तो उसे मिलने वाले वित्तीय लाभ भी अवैध हो जाते हैं. हालांकि, इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी गई थी, जहां उन्हें अंतरिम राहत मिली. इस कानूनी विवाद के अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले ही, अक्टूबर 2023 में पी. वेलदुरई का निधन हो गया, जिससे यह मामला एक कानूनी नजीर बनकर रह गया.