विदेशों में औसतन रोज 20 भारतीय कामगारों की मौत
विदेशों में औसतन रोज 20 भारतीय कामगार की मौत
नई दिल्ली । डेस्क: विदेशों में आजीविका की तलाश में गए भारतीय श्रमिकों की मृत्य को लेकर बेहद विचलित करने वाले आंकड़े सामने आए हैं. राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच विदेशों में कुल 37,740 भारतीय श्रमिकों की मृत्यु हुई है, जिसका औसत निकाला जाए तो पिछले पांच वर्षों में हर दिन लगभग 20 से अधिक भारतीयों ने विदेशी धरती पर अपनी जान गंवाई है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन मौतों में से 86 प्रतिशत से अधिक मामले अकेले खाड़ी देशों से जुड़े हैं. संयुक्त अरब अमीरात में सर्वाधिक 12,380 और सऊदी अरब में 11,757 श्रमिकों की मृत्यु दर्ज की गई है.
चिंताजनक बात यह है कि 2022 में मौतों के आंकड़ों में आई गिरावट के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है, जो 2025 में बढ़कर 7,854 तक पहुंच गई है.
श्रमिकों की सुरक्षा का संकट केवल मृत्यु दर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शोषण और दुर्व्यवहार के मामलों में भी भारी उछाल देखा गया है.
पिछले पांच वर्षों में भारतीय दूतावासों को प्रताड़ना, वेतन में देरी और पासपोर्ट जब्त करने जैसी कुल 80,985 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.
दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में मृत्यु दर कम होने के बावजूद 2025 में शिकायतों की संख्या में अचानक तेजी आई है.
श्रमिकों ने मुख्य रूप से वेतन का भुगतान न होने, ओवरटाइम के पैसे न मिलने, छुट्टी से वंचित रखने और अनुबंध खत्म होने के बाद भी एग्जिट वीजा न देने जैसी गंभीर समस्याएं साझा की हैं.
भारत सरकार ने इस मुद्दे पर आश्वासन दिया है कि विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए विभिन्न देशों के साथ श्रम सहयोग समझौतों के माध्यम से कानूनी सहायता और सहायता प्रदान की जा रही है.