ओडिशा में 2026 तक माओवाद खत्म करने के लिए ऑपरेशन तेज
भुवनेश्वर । डेस्क: पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शीर्ष माओवादी ऑपरेटिव्स को खत्म किए जाने के बीच, ओडिशा भी मार्च 2026 तक इस खतरे को जड़ से खत्म करने के केंद्र के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरे जोर-शोर से लगा हुआ है. अतिरिक्त डीजी और नक्सल विरोधी अभियान के प्रमुख संजीव पांडा ने कहा कि ओडिशा पुलिस के लगातार अभियानों से महत्वपूर्ण परिणाम मिले हैं और वे जारी रहेंगे. इन अभियानों ने माओवादियों को गहरे जंगलों में धकेल दिया है क्योंकि उनकी हथियार आपूर्ति काट दी गई है और पड़ोसी राज्यों से जुड़ने वाले रास्ते रोक दिए गए हैं.
इस साल, राज्य में 19 नक्सलियों को मार गिराया गया है. 8 गिरफ्तार हुए, 6 ने ओडिशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया जबकि 7 अन्य ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) में ओडिशा के मूल निवासियों की संख्या में भारी गिरावट आई है.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गृह मंत्रालय के नवीनतम वर्गीकरण की ओर भी इशारा किया, जिसमें ओडिशा के किसी भी जिले को 'सबसे अधिक प्रभावित जिलों' और 'चिंता वाले जिलों' की श्रेणियों में नहीं रखा गया है. पांडा ने बताया, "छत्तीसगढ़ के तीन जिले और ओडिशा में कंधमाल 'अन्य वामपंथी उग्रवाद (LWE)-प्रभावित जिलों' की श्रेणी में हैं. कालाहांडी, रायगड़ा, बौद्ध, गजपति और नुवापाड़ा सहित आठ जिले 'विरासत और जोर' (Legacy and thrust) जिलों की श्रेणी में हैं."
'अन्य LWE-प्रभावित जिले' वे हैं जिनमें सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता है और वे 'सबसे अधिक प्रभावित' या 'चिंता वाले जिलों' की श्रेणियों में नहीं हैं. 'विरासत और जोर' जिलों की श्रेणी में वे जिले आते हैं, जहां नक्सलवाद खत्म हो चुका है लेकिन वे LWE विस्तार के संभावित स्थल हैं.
यह बताते हुए कि ओडिशा अगले साल तक नक्सल खतरे को खत्म करने में सक्षम होगा, पांडा ने कहा कि आने वाले दिनों में जोरदार अभियान जारी रहेंगे, और उन्होंने राज्य में सक्रिय नक्सलियों से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा.
सूत्रों के अनुसार, ओडिशा में करीब 80 से 85 ऑपरेटिव सक्रिय हैं. इनमें से अधिकांश छत्तीसगढ़ के हैं और केवल तीन ओडिशा से हैं. जगतसिंहपुर के मूल निवासी निखिल और उनकी पत्नी राज्य से सक्रिय तीन लोगों में से हैं. दूसरा माओवादी मलकानगिरी जिले का रहने वाला है. राज्य में सक्रिय नक्सलियों के पास हथियारों और गोला-बारूद की कमी है और लगातार अभियानों ने उन्हें किसी भी कार्रवाई से दूर रखा है.
माओवादियों को राज्य में प्रवेश करने से रोकने के लिए छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में भी सुरक्षा उपाय कड़े कर दिए गए हैं.