मोटापे का होगा निदान, वैज्ञानिकों ने की खोज
मोटापे के निदान के लिए वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है
रायपुर | जे के करः मोटापा से छुटकारा पाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई खोज कर ली है. इसके लिए केवल भोजन से जुड़ी याद्दाश्त की कोशिका का संपर्क काट दिया जाएगा और इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकेगा.
असल में मोटापा आज एक आम समस्या बन चुकी है, जो न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है.
स्वस्थ रहने और मोटापे के बीच एक बारीक अंतर है, इसे समझना जरुरी है. शरीर के बढ़ते आकार को लेकर समाज में जो नजरिया बना हुआ है, वह कई बार शारीरिक से ज़्यादा मानसिक चोट पहुंचाता है.
जब कोई व्यक्ति किसी के शरीर के आकार, वजन या रंग को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करता है या मज़ाक उड़ाता है. यह बॉडी शेमिंग एक गंभीर समस्या बनती जा रही है.
जब किसी व्यक्ति का वजन उसकी उम्र और लंबाई की सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है, तो इसे मोटापा कहते हैं. यह तब होता है जब शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है.
मोटापे को मापने का सबसे आम तरीका है बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई). अगर किसी का बीएमआई 30 या उससे ज्यादा है, तो उसे मोटापा माना जाता है. मोटापा एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है.
यह न केवल आपके शरीर को प्रभावित करता है, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है.
मोटापे को लेकर दुनिया भर में कई शोध हो रहे हैं, वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि कैसे मोटापे को दूर किया जाए. अब इससे जुड़ा एक शोध सामने आया है, जिसे लेकर वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हैं.
हाल ही में अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जो मोटापे के इलाज में क्रांतिकारी हो सकती है. उन्होंने पाया कि मस्तिष्क में कुछ खास कोशिकाएँ भोजन से जुड़ी यादों को संग्रहित करती हैं.
ये कोशिकाएँ यह याद रखती हैं कि आपने क्या खाया, कब खाया और कहाँ खाया. इन्हें मील एंग्राम कहा जाता है.
प्रयोगों में, जब चूहों की इन कोशिकाओं को निष्क्रिय किया गया, तो वे भोजन से जुड़ी जानकारी भूल गए, लेकिन अन्य चीजें याद रख सके. यह भी पाया गया कि ये कोशिकाएँ मस्तिष्क के भूख केंद्र से जुड़ी होती हैं.
जब यह संबंध तोड़ा गया, तो चूहों ने ज्यादा खाना खाया.
इस खोज का मतलब है कि भूख और याददाश्त का गहरा संबंध है. शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर भोजन से जुड़ी यादों को नियंत्रित किया जाए, तो लोगों को यह याद रखने में मदद मिल सकती है कि उन्होंने कितना और कब खाया.
इससे अनावश्यक खाने की इच्छा कम हो सकती है, जो मोटापे को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है.
हालांकि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है और इसे इंसानों पर लागू करने में समय लग सकता है. वैज्ञानिकों को अभी और शोध करना होगा ताकि वे ऐसी तकनीक विकसित कर सकें, जो भोजन की यादों को बेहतर बनाए और भूख को नियंत्रित करे.
अगर यह सफल रहा, तो यह मोटापे के इलाज में एक नया और प्रभावी तरीका हो सकता है.
भारत में बढ़ रहा पेट का मोटापा
असल में मोटापा अब एक वैश्विक समस्या है. संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 5 में से 2 वयस्क इस समस्या से जूझ रहे हैं. भारत में भी यह तेजी से बढ़ रहा है, खासकर पेट का मोटापा.
अध्ययन के अनुसार, भारत में 40% महिलाएँ और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. खासकर 30 से 49 साल की उम्र की महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी गई है.
यह समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यम व निम्न आय वर्ग के लोगों में भी पेट का मोटापा बढ़ रहा है. यह उन लोगों में ज्यादा देखा जाता है जो मांसाहारी भोजन करते हैं, धनी हैं या शहरों में रहते हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई का असंतुलन तेज़ी से बढ़ा है.
ये बीएमआई क्या है?
बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) एक आसान गणना है, जो यह बताती है कि आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से ठीक है या नहीं. इसे आपके वजन (किलोग्राम में) को आपकी लंबाई (मीटर में) के वर्ग से भाग देकर निकाला जाता है.
18.5 से कम बीएमआई: कम वजन
18.5 से 24.9: सामान्य
25 से 29.9: अधिक वजन
30 या उससे ज्यादा: मोटापा
हालांकि, बीएमआई पूरी तरह सटीक नहीं है. उदाहरण के लिए, एक खिलाड़ी का बीएमआई ज्यादा हो सकता है क्योंकि उसकी मांसपेशियाँ भारी होती हैं, लेकिन वह स्वस्थ होता है.
बच्चों, बुजुर्गों या गर्भवती महिलाओं के लिए बीएमआई की व्याख्या अलग होती है. इसलिए, सही जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
मोटापे को कैसे पहचाना जाता है?
मोटापे के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन डॉक्टर इसे निम्न तरीकों से पहचानते हैं.
बीएमआई की गणना: यह वजन और लंबाई के आधार पर मोटापे को मापता है.
कमर की माप: अगर पुरुषों की कमर 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं की 35 इंच से ज्यादा है, तो यह हृदय रोग या मधुमेह का खतरा बढ़ा सकता है.
शारीरिक जांच: डॉक्टर आपके स्वास्थ्य, जीवनशैली और पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी लेते हैं.
मोटापे को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
क्लास I: बीएमआई 30-34.9
क्लास II: बीएमआई 35-39.9
क्लास III: बीएमआई 40 या उससे ज्यादा
मोटापे के कारण
मोटापा होने का सबसे बड़ा कारण है जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना और उसे खर्च न करना. इसके कई कारण हो सकते हैं:
खानपान की गलत आदतें: ज्यादा तला-भुना, मीठा, या प्रोसेस्ड भोजन खाने से वजन बढ़ता है.
शारीरिक गतिविधि की कमी: ज्यादा समय टीवी, मोबाइल, या कंप्यूटर पर बिताने से व्यायाम का समय कम हो जाता है.
नींद की कमी: 7 घंटे से कम नींद लेने से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं.
तनाव: तनाव में लोग अक्सर ज्यादा खाते हैं, खासकर मीठा या तला हुआ भोजन.
दवाएँ: कुछ दवाएँ, जैसे डिप्रेशन या मधुमेह की दवाएँ, वजन बढ़ा सकती हैं.
आनुवंशिकी: कुछ लोगों में जीन के कारण भूख ज्यादा लगती है, जिससे मोटापा बढ़ सकता है.
शारीरिक अक्षमता: शारीरिक सीमाओं के कारण व्यायाम करना मुश्किल हो सकता है.
मोटापे से होने वाली समस्याएँ
मोटापा कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है:
हृदय रोग: मोटापा दिल का दौरा, स्ट्रोक, और उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ाता है.
टाइप 2 मधुमेह: मोटापा इस बीमारी का प्रमुख कारण है, जिसमें ब्लड शुगर नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है.
लीवर की बीमारी: अतिरिक्त चर्बी लीवर में जमा होकर सूजन या स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है.
पित्ताशय की पथरी: ज्यादा कोलेस्ट्रॉल के कारण पथरी बन सकती है.
किडनी रोग: मधुमेह और उच्च रक्तचाप किडनी को नुकसान पहुँचा सकते हैं.
कैंसर: मोटापा स्तन, गर्भाशय, और पेट के कैंसर का खतरा बढ़ाता है.
साँस की समस्या: मोटापे से स्लीप एपनिया और अस्थमा जैसी समस्याएँ हो सकती हैं.
गठिया: ज्यादा वजन जोड़ों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द और गठिया हो सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य: मोटापा डिप्रेशन और आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकता है.
मोटापे का इलाज
मोटापे के इलाज की बात करें तो- लगभग ये आपके खुद के हाथों में हैं इसे आप खुद कंट्रोल कर सकते हैं.
जैसे खानपान में बदलाव: स्वस्थ भोजन, जैसे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, और कम चर्बी वाला प्रोटीन खाएँ.
मेडिटेरेनियन या DASH डाइट जैसी योजनाएँ अपनाएँ, जो पोषण से भरपूर होती हैं.
ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, जैसे तला हुआ भोजन और मीठे पेय कम करें.
व्यायाम: रोजाना 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना, या तैरना, कैलोरी जलाने में मदद करती है.
छोटे-छोटे बदलाव, जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियाँ लेना भी फायदेमंद हैं.
मानसिक स्वास्थ्य सहायता: तनाव कम करने के लिए परामर्श या सहायता समूहों का सहारा लें.
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) भोजन की आदतों को सुधारने में मदद कर सकती है.
दवाएँ: कुछ दवाएँ भूख कम करने में मदद करती हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लें. भारत में इनका उपयोग कम होता है.
सर्जरी
अगर बीएमआई 40 से ज्यादा है, तो बैरिएट्रिक सर्जरी एक विकल्प हो सकता है. यह पेट या आंत को बदलकर कैलोरी के अवशोषण को कम करती है.
इन सबसे इतर एक महत्वपूर्ण बात अत्यधिक मोटापे से बीमारी हो सकती पर किसी बीमारी की वजह से भी आप मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं किसी दवाई के साइड इफेक्ट्स से भी मोटापा हो जाता है.
जाने-अनजाने हम किसी व्यक्ति की परेशानी को बॉडीसेमिंग कर देते हैं. इस बॉडी शेमिंग का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता.
यह मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है, इसमें आत्मविश्वास में कमी, चिंता और डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव, आत्महत्या के विचार तक आने लगते हैं जिसे रोकने की बेहद जरुरत हैं.
मोटापा एक जटिल समस्या है, लेकिन सही जानकारी, स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय सहायता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है. छोटे-छोटे बदलाव जैसे स्वस्थ खाना, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन, बड़े परिणाम दे सकते हैं.
साथ ही, नई खोजें मोटापे के इलाज में नई उम्मीद लेकर आई हैं. अगर आप मोटापे से जूझ रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें.
अपने लिये सही योजना बनाएं और दूसरों की बॉडी शेमिंग करने से भी बचें.