OGAI में एक भी ऑनलाइन गेम रजिस्टर्ड नहीं: CIC में MeitY का खुलासा
नई दिल्ली । डेस्क: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के समक्ष खुलासा करते हुए बताया है कि ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) के तहत अब तक किसी भी ऑनलाइन गेम को रजिस्ट्रेशन नहीं मिला है. इसके साथ ही मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 1 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी 201 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं.
एक आरटीआई याचिका के जवाब में दी गई यह जानकारी भारत में ऑनलाइन गेमिंग पर कड़े सरकारी नियंत्रण और हाल ही में लागू हुए नए कानूनों की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है.
मंत्रालय के अनुसार, देश में ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेम्ज एक्ट, 2025' और इसके नियमों को 1 मई 2026 से पूरी तरह लागू कर दिया गया है.
इस कानून के तहत गठित OGAI को ही गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की निगरानी और पंजीकरण का जिम्मा दिया गया है. मंत्रालय ने यह भी माना कि साल 2023 के आईटी नियमों में संशोधन के बावजूद गेमिंग से जुड़े प्रावधान अमल में नहीं आ सके थे, जिसके बाद यह नया कानून लाना पड़ा. सीआईसी ने मंत्रालय के इस जवाब को पर्याप्त मानते हुए मामले का निपटारा कर दिया है.
सरकार ने अब नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स, विज्ञापनदाताओं और वित्तीय लेनदेन में मदद करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधानों की चेतावनी दी है.
गैर-कानूनी ऑनलाइन मनी गेम्स ऑफर करने या उन्हें बढ़ावा देने पर धारा 5 के तहत 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जबकि बार-बार अपराध करने पर सजा और जुर्माना दोनों बढ़ जाएंगे.
इसी तरह धारा 6 और 7 के तहत भ्रामक विज्ञापनों और अवैध वित्तीय लेनदेन में शामिल पेमेंट गेटवे पर भी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. सरकार का यह सख्त रुख साफ दिखाता है कि अब केवल गेमिंग कंपनियां ही नहीं, बल्कि प्रचार और वित्तीय माध्यम से जुड़ा पूरा डिजिटल तंत्र कानूनी दायरे में आ चुका है.