देश की कीमत पर कोई FTA नहीं- पीयूष गोयल
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) कभी भी राष्ट्रीय हितों की कीमत पर नहीं होंगे. श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रोसेसिंग एंड इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एसोसिएशन (JKPICCA) के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के दौरान, मंत्री ने कहा कि सरकार सभी व्यापार समझौतों को पारस्परिक बनाने और भारतीय व्यापारियों और निर्माताओं के हितों की रक्षा करने के लिये प्रतिबद्ध है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि FTA का उद्देश्य भारतीय वस्तुओं को अन्य देशों में शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करना और अन्य बाजारों तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर करना है. हालांकि, उन्होंने कहा, "यह स्वाभाविक है कि FTA में दोतरफा व्यापार होगा. ऐसा नहीं हो सकता कि वे हमारे सामान के लिये अपने बाजार खोलें और हम ऐसा न करें."
मंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार विदेशी साझेदारों के साथ बाजार पहुंच पर बातचीत करते समय संवेदनशील क्षेत्रों या क्षेत्रीय चिंताओं से समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा, "व्यापारियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. हम जो भी FTA करेंगे, उसमें जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के हितों का ध्यान रखा जायेगा."
बैठक में कोल्ड चेन और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बनाये रखने की रणनीतियों पर चर्चा हुई, जो जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
मंत्री गोयल ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "आज, मैंने श्रीनगर में JKPICCA के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की. इस दौरान, कोल्ड चेन और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बनाए रखने की रणनीतियों पर चर्चा हुई, जो जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं."
उन्होंने हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों पर लगने वाले वस्तु और सेवा कर (GST) को कम करने के लिए काम करने का वादा किया. गोयल ने कहा, "दो-तीन प्रतिनिधिमंडलों ने हस्तशिल्प और हथकरघा पर लगने वाले GST का मुद्दा मेरे सामने उठाया. मैंने सुझाव दिया है कि वे इस मामले में वित्त मंत्रालय और मुझे एक आवेदन प्रस्तुत करें ताकि हम यह पता लगा सकें कि क्या राहत दी जा सकती है."
उन्होंने आगे कहा, "हम इन वस्तुओं पर GST दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की कोशिश करेंगे, जिससे हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा, खासकर जम्मू-कश्मीर में. हम इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे."