वोटर लिस्ट में 'नए बेटे': 70 साल के बासुदेब को सताया ज़मीन छिनने का डर
कोलकाता । डेस्क: विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप निवासी 70 वर्षीय बासुदेब दास गहरे सदमे और चिंता में हैं. चिंता का विषय उनका वोट नहीं, बल्कि उनकी छोटी-सी जमीन और घर है.
पेशे से मज़दूर बासुदेब के पहले से दो बेटे और एक बेटी हैं. लेकिन उन्हें मतदाता सूची में पता चला कि उनके नाम के साथ कम से कम दो और बेटों और संभवतः एक बेटी का नाम भी पिता के रूप में जुड़ा हुआ है.
इनमें से एक 'नया' बेटा तृणमूल कांग्रेस के ज़िला परिषद सदस्य संचय दास हैं, जो प्रतापआदित्यनगर ग्राम पंचायत से निर्वाचित हुए हैं, जहां बासुदेब भी वोटर हैं. 2002 की वोटर लिस्ट में संचय दास को संजय दास के रूप में बासुदेब दास का बेटा दिखाया गया है, और 2024 की लोकसभा चुनाव की सूची में भी वह संचय दास के रूप में सूचीबद्ध हैं. दोनों नाम (संजय और संचय) के वोटर-आईडी कार्ड नंबर एक ही हैं.
बासुदेब को डर है कि कहीं यह 'अचानक' पाया गया बेटा, संचय दास, उनकी मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर दावा न कर दे. बासुदेब कहते हैं, "मेरे पास बस यही है. मैं चाहता हूं कि मेरी मौत से पहले यह मामला सुलझ जाए. वह मेरा बेटा नहीं है. मैं उसका पिता कैसे हो सकता हूं?"
बासुदेब ने ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) और काकद्वीप के उप-मंडल अधिकारी (SDO) को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि एक बांग्लादेशी निवासी, संजय दास उर्फ संचय दास ने खुद को वोटर लिस्ट में नामांकित किया है और उन्हें अपना पिता बताया है. उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच करने और उनके तथा उनके बच्चों के भविष्य में कानूनी समस्या से बचने के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में भी गुहार लगाई है.
वहीं, ज़िला परिषद सदस्य संचय दास ने स्वीकार किया है कि वह मूल रूप से बांग्लादेश से हैं लेकिन उन्होंने बाकी आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने दावा किया कि उनका नाम हमेशा संचय रहा है, संजय नहीं, और उनके पिता बसुदेब दास अब जीवित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वह चार दशक पहले एक छोटे लड़के के रूप में बांग्लादेश से आए थे और अब भारत के नागरिक हैं. उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि शिकायत दर्ज हो चुकी है और चुनाव आयोग मामले की जांच कर रहा है, इसलिए इस समय कोई बयान देना उचित नहीं होगा.
गौरतलब है कि एसआईआर पूरा होने के बाद, पश्चिम बंगाल में 'तार्किक खामियों' के कारण लगभग 1.67 करोड़ मतदाता निर्वाचन आयोग की जांच के दायरे में आ गए हैं. अकेले दक्षिण 24 परगना में मृत, लापता और डुप्लीकेट मतदाताओं के 8.16 लाख अधिकतम मामले सामने आए हैं.
आरोप है कि 2002 की मतदाता सूची में पश्चिम बंगाल के लगभग 24,21,133 मतदाताओं को 2025 की मतदाता सूची में छह से अधिक मतदाताओं द्वारा 'माता-पिता' के रूप में टैग किया गया है. बासुदेब के मामले में अब तक पांच मतदाताओं ने उन्हें माता-पिता के रूप में टैग किया है.
स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी इस मामले को केंद्रीय चुनाव पैनल के ध्यान में लाया है और संचय दास से नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) प्रक्रिया का पालन करने की मांग की है.
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.