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नई खोज मस्तिष्क से निकलती है रहस्यमयी रोशनी

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29 जुल. 2025, 12:42 AM 3 मिनट में पढ़ें 5

मष्तिस्क
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नई दिल्ली । डेस्क: क्या आप जानते हैं कि मानव मस्तिष्क से लगातार हल्की-सी रोशनी निकलती रहती है? जी हाँ, यह कोई जादू या काल्पनिक बात नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक खोज है, जिसे कनाडा और अमरीका के शोधकर्ताओं ने हाल ही में उजागर किया है.


इस खोज के अनुसार, हमारे मस्तिष्क से अत्यंत सूक्ष्म प्रकाश संकेत (फोटॉन) निकलते हैं, जो हमारी मानसिक अवस्था के साथ बदलते रहते हैं. यह रोशनी इतनी कमजोर है कि इसे नग्न आँखों से देखना असंभव है, लेकिन विशेष उपकरणों की मदद से इसे रिकॉर्ड किया जा सकता है.

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‘आईसाइंस’ पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि मस्तिष्क से निकलने वाली यह रोशनी खोपड़ी को भेदकर बाहर आती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रकाश की तीव्रता व्यक्ति की मानसिक गतिविधियों, जैसे आँखें बंद करना या अचानक कोई आवाज सुनने जैसे कार्यों के साथ बदलती रहती है.


इस खोज ने मस्तिष्क के कार्यों को समझने के लिये एक नए क्षेत्र, जिसे ‘फोटॉनसेफालोग्राफी’ कहा जा रहा है, के द्वार खोल दिये हैं.


जुगनू, जेलीफिश या ईल मछली जैसे जीवों में चमकने वाली रोशनी को बायोल्यूमिनेसेंस कहा जाता है, लेकिन मस्तिष्क से निकलने वाली रोशनी का कारण इससे अलग है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रोशनी सामान्य चयापचय (मेटाबॉलिज्म) के दौरान सभी जीवित कोशिकाओं से निकलने वाले अति-सूक्ष्म फोटॉन उत्सर्जन का परिणाम है.


इस प्रक्रिया में उत्तेजित अणु एक फोटॉन (प्रकाश कण) छोड़ते हैं, जिससे वे कम ऊर्जा स्तर पर लौट आते हैं. यह रोशनी इतनी कमजोर होती है कि यह हमारे द्वारा सामान्य रूप से देखे जाने वाले प्रकाश की तुलना में लगभग दस लाख गुना कम तीव्र होती है.


हालांकि यह सूक्ष्म रोशनी शरीर के अन्य अंगों से भी निकलती है, लेकिन मस्तिष्क से इसका उत्सर्जन अधिक होता है. इसका कारण है मस्तिष्क में ऊर्जा की अधिक खपत और फ्लेविन, सेरोटोनिन, और प्रोटीन जैसे प्रकाश-सक्रिय यौगों की उच्च सांद्रता. ये यौग प्रकाश को अवशोषित और उत्सर्जित करने में सक्षम होते हैं, जिसके कारण मस्तिष्क से निकलने वाली रोशनी की मात्रा अन्य अंगों की तुलना में अधिक होती है.


भविष्य की संभावनाएँ


वैज्ञानिकों का मानना है कि इस रोशनी का अध्ययन मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने में एक नई क्रांति ला सकता है.


यह तकनीक भविष्य में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों, जैसे अल्जाइमर या डिप्रेशन, के निदान और उपचार में मददगार हो सकती है. इस खोज ने न केवल मस्तिष्क के रहस्यों को उजागर करने का मार्ग प्रशस्त किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि विज्ञान कितनी तेजी से हमारे शरीर की गहराइयों को समझने की दिशा में बढ़ रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP