नेपाल: राजनेताओं के बच्चों की विलासिता ने भड़काया युवाओं का गुस्सा
काठमांडू । डेस्क: नेपाल में हाल के दिनों में #नेपोकिड्स नामक सोशल मीडिया ट्रेंड ने देश के राजनीतिक अभिजनों के बच्चों की विलासितापूर्ण जीवनशैली को उजागर कर युवाओं के बीच आक्रोश को हवा दी है. इस ट्रेंड में टिकटॉक और एक्स पर वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जो कथित तौर पर मंत्रियों और पूर्व न्यायाधीशों के बच्चों को महंगे रेस्तरां में भोजन करते, मर्सिडीज कारों के साथ पोज देते और लक्जरी छुट्टियों का आनंद लेते दिखाते हैं.
इन छवियों को नेपाल की आम जनता की गरीबी और संघर्षों के दृश्यों के साथ जोड़ा जा रहा है, जहां हर चौथा व्यक्ति राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहता है.
विशेष रूप से, एक तस्वीर में एक मंत्री का बेटा लुई वितॉन और कार्टियर के डिब्बों से सजा क्रिसमस ट्री के साथ पोज देता दिखाई दे रहा है. हालांकि इन तस्वीरों की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ये भ्रष्टाचार और असमानता के प्रतीक बन गए हैं, जिसे कई नेपाली राजनीतिक नेताओं और उनके रिश्तेदारों की संपत्ति का कारण मानते हैं.
वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के कार्यकारी निदेशक रकीब नाइक के अनुसार, “नेपाल के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में हजारों ऐसे वीडियो ट्रेंड कर रहे हैं. अभिजात्य विशेषाधिकार और रोजमर्रा की कठिनाइयों के बीच का यह अंतर जेन-जेड के बीच गहरी प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है और यह आंदोलन का केंद्रीय कथानक बन गया है.”
#नेपोकिड्स ट्रेंड, जो नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) का संक्षिप्त रूप है, पश्चिमी देशों में ‘नेपो बेबीज़’ की अवधारणा से मिलता-जुलता है.
यह ट्रेंड नेपाल में व्यापक भावना को दर्शाता है कि राजनीतिक वर्ग की समृद्धि आम जनता की कीमत पर आई है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने नेपाल को एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक के रूप में रैंक किया है.
भ्रष्टाचार के कई मामले, जैसे पोखरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में 71 मिलियन डॉलर की हेराफेरी और भूटान से निर्वासित नेपाली शरणार्थियों के नाम पर अमेरिका में रोजगार के लिए युवाओं से धन वसूलने के घोटाले, सामने आए हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम मामलों में सजा हुई है.
युवाओं का गुस्सा विशेष रूप से उन राजनेताओं की ओर है, जो अपने बच्चों के लिए विशाल संपत्तियां जमा करते दिख रहे हैं. कई लोग मांग कर रहे हैं कि इन संपत्तियों की जांच हो.
सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए अल्पकालिक प्रतिबंध ने प्रदर्शनकारियों को और भड़का दिया, जिन्होंने इसे असमानता के खिलाफ आलोचना को दबाने की कोशिश के रूप में देखा.
मंगलवार को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों का मूल कारण यह प्रतिबंध था, लेकिन इसके पीछे वर्षों से जमा हुआ नेताओं के खिलाफ आक्रोश भी था. (फोटो- प्रतीकात्मक)