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नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद पीएम का इस्तीफा

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09 सित. 2025, 03:22 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

ओपी शर्मा
ओपी शर्मा

काठमांडू । डेस्क: नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें सोमवार को 19 लोगों की मौत हो गई. इसके एक दिन बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री खड्गा प्रसाद शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. ओली ने कहा कि उनका इस्तीफा देश को "राजनीतिक समाधान और समस्याओं के निपटारे की दिशा में आगे बढ़ने" के लिए है. 


प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू की अवहेलना करते हुए संसद भवन में घुसकर आग लगा दी. इसके अलावा, नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के कार्यालय, कई प्रमुख राजनेताओं के आवासों और देश के सबसे बड़े मीडिया समूह कांतिपुर पब्लिकेशन्स के कार्यालय पर भी हमला किया गया, जिसके कारण द काठमांडू पोस्ट की वेबसाइट डाउन हो गई. अखबार ने सोशल मीडिया पर अपडेट्स देने की बात कही है.

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सोमवार देर रात सरकार ने सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी हटा ली, जिसके बाद काठमांडू और अन्य शहरों में जेन-जेड के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए. इन प्रदर्शनों के चलते नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने काठमांडू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया. भारत ने नेपाल के साथ अपनी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है.


राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने हिंसक प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय एकता की अपील की है. उन्होंने एक बयान में कहा, "मैं सभी नागरिकों, विशेष रूप से प्रदर्शनकारियों, से देश की कठिन परिस्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सहयोग करने की अपील करता हूँ. मैं सभी पक्षों से संयम बरतने, देश को और नुकसान न होने देने और बातचीत के लिए आगे आने का आग्रह करता हूँ." पौडेल का यह बयान तब आया जब प्रदर्शनकारियों ने उनके कार्यालय, संसद भवन और कई राजनेताओं के आवासों में आग लगा दी.


नेपाली सेना ने भी प्रदर्शनकारियों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है. सेना के जनसंपर्क और सूचना निदेशालय ने एक बयान में कहा, "प्रदर्शनों में हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर हमें गहरा दुख है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है. नेपाली सेना सभी युवाओं और नागरिकों से संयम बरतने की अपील करती है."


नेपाल का राजनीतिक इतिहास लंबे समय से अस्थिर रहा है. 2008 के बाद से देश में 14 सरकारें बन चुकी हैं, जिनमें से कोई भी पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी. 1951 में राणा शासन के खिलाफ प्रजातंत्र की स्थापना हुई थी, लेकिन 1961 में राजा महेंद्र ने पंचायत व्यवस्था लागू कर राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया. 1990 में जनआंदोलन ने बहुदलीय लोकतंत्र को बहाल किया. 1996 में माओवादियों ने राजशाही को उखाड़ फेंकने के लिए हिंसक विद्रोह शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप दस साल के गृहयुद्ध में 17,000 से अधिक लोग मारे गए. 2006 में राजशाही के खिलाफ जनप्रदर्शनों ने 2008 में नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया. 2015 में नया संविधान लागू हुआ. खड्गा प्रसाद शर्मा ओली 2015, 2018, 2021 और 2024 में चार बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकारें भी स्थिरता नहीं ला सकीं.


वर्तमान प्रदर्शन नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं. प्रदर्शनकारियों ने न केवल सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, बल्कि प्रमुख राजनेताओं और दलों के कार्यालयों को भी क्षति पहुंचाई. द काठमांडू पोस्ट ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि हमले के कारण उनके सर्वर डाउन हो गए हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पत्रकारिता जारी रखेंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP