PM कार्की का राजनयिकों से वादा: 6 माह में चुनी हुई सरकार को सत्ता
काठमांडू । डेस्क: नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने शुक्रवार को काठमांडू-स्थित राजनयिकों को संबोधित करते हुए यह प्रतिबद्धता जताई कि उनकी अंतरिम सरकार अधिकतम छह महीने तक ही कार्य करेगी. जिसके बाद वह शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को सौंप देंगी.
पिछले महीने अंतरिम सरकार के गठन के बाद राजनयिकों के लिए अपनी पहली ब्रीफिंग में, कार्की ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार एक गैर-राजनीतिक, संक्रमणकालीन प्रशासन है, जिसका एकमात्र, गैर-परक्राम्य जनादेश 5 मार्च, 2026 को प्रतिनिधि सभा के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और तटस्थ आम चुनाव कराना है.
यह अंतरिम सरकार 8 और 9 सितंबर को हुए देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद स्थापित की गई थी, जिसमें 70 से अधिक लोग, जिनमें ज्यादातर युवा छात्र थे, मारे गए थे. इस अशांति के कारण केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का तख्तापलट हुआ और प्रतिनिधि सभा भंग कर दी गई थी.
प्रमुख प्राथमिकताएं: चुनाव और सुधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का पूरा ध्यान विश्वसनीय चुनाव के लिए आवश्यक कानूनी ढांचे, सुरक्षा और लॉजिस्टिक तैयारी जैसे माहौल बनाने पर केंद्रित है. उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य राजनीतिक एजेंडा चलाना नहीं, बल्कि एक नई, वैध सरकार के लिए मार्ग प्रशस्त करना है."
उन्होंने "जेन-ज़ी प्रतिनिधियों" सहित सभी राजनीतिक दलों और हितधारकों के साथ बातचीत करने, चुनाव आयोग को सशक्त बनाने और यहाँ तक कि विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों के लिए बाह्य मतदान प्रणाली की संभावना तलाशने की बात भी बताई.
उन्होंने सरकार की अन्य प्राथमिकताओं में पारदर्शी शासन की दिशा में काम करना, आर्थिक सुधार, और युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करना भी गिनाया.
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और आर्थिक एजेंडा
कार्की ने बताया कि सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद करने और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए राष्ट्रीय बजट में संशोधन जैसे कदम उठाए हैं. उन्होंने जमे हुए भ्रष्टाचार पर मुकदमा चलाने के लिए फाइलें खोलने की बात भी कही और कहा कि उच्च-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों में विश्वसनीय और निष्पक्ष जाँच शुरू की जाएगी ताकि यह दर्शाया जा सके कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र को आर्थिक विकास का मुख्य इंजन मानते हुए उसे बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधार भी कर रही है.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्थिक और राजनीतिक सुधार केवल 'जेन-ज़ी' की मांगें नहीं हैं, बल्कि हर नेपाली नागरिक की आकांक्षाएँ हैं.
विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की अपील
विदेश नीति पर, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, गुटनिरपेक्षता और पंचशील के सिद्धांतों के प्रति नेपाल की प्रतिबद्धता को दोहराया. चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भी, उन्होंने तत्काल संकट-पश्चात आर्थिक सुधार के महत्व को स्वीकार किया और व्यापार विश्वास बहाल करने, बुनियादी ढांचे के नुकसान को दूर करने और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के सामान्य कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की सराहना की.
उन्होंने सितंबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान खोए या चोरी हुए हथियारों और उपकरणों को तुरंत पुनः प्राप्त करने के लिए काम करने की बात कही.
समापन में, प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देश की सकारात्मक स्थिति को साझा करने में मदद करने का अनुरोध किया. उन्होंने 'जेन-ज़ी' की ऊर्जा में गहरा विश्वास व्यक्त किया और उनसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रचनात्मक रूप से शामिल होने का आग्रह किया.