प्रदर्शनकिरियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था- ओली
काठमांडू । डेस्क: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस महीने की शुरुआत में हुए जेन जेड प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को गोली चलाने का आदेश देने के आरोपों को खारिज किया है. इन प्रदर्शनों में कम से कम 72 लोगों की मौत हुई थी, जो नेपाल में हाल के वर्षों में सबसे खूनी अशांति थी.
संविधान दिवस पर अपने संदेश में, ओली ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का कोई आदेश नहीं दिया. उन्होंने दावा किया कि 8 सितंबर को मारे गए प्रदर्शनकारियों पर जिन हथियारों से गोली चली, वे पुलिस के पास नहीं थे.
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष ओली ने "घुसपैठियों" पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया, जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक बना दिया. उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की.
ओली ने 9 सितंबर को अपने इस्तीफे के बाद काठमांडू में हुई आगजनी की घटनाओं का भी जिक्र किया, जिसमें सिङ्दुरबार सचिवालय और सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया गया था.
वहीं, अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने राष्ट्रीय दिवस पर कहा कि ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं की नाराजगी को दर्शाते हैं.
नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री कार्की ने सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए सुधारों का वादा किया. उन्होंने कहा, "लोकतंत्र संवाद और समाधान खोजने की प्रणाली है."
जेन जेड प्रदर्शनों ने नेपाल के राजनीतिक वर्ग को हिलाकर रख दिया है.
ओली के इस्तीफे के बाद वह काठमांडू के पास शिवपुरी जंगल क्षेत्र में सेना के बैरक में चले गए थे और बाद में भक्तपुर जिले में एक निजी आवास में स्थानांतरित हो गए.