नेपाल चुनाव: बालेन शाह और ओली के बीच कड़ा मुकाबला
नई दिल्ली । डेस्क: नेपाल में पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल करने वाले हिंसक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद, देश अब अपने पहले राष्ट्रीय चुनाव के लिए तैयार है. आगामी 5 मार्च को होने वाले इन चुनावों में लगभग 1.9 करोड़ मतदाता 275 सदस्यीय विधानसभा के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
विशेष रूप से, पिछले साल हुए आंदोलनों के बाद करीब 10 लाख नए युवा मतदाता सूची में जुड़े हैं, जो इस चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इस बार के चुनावी मैदान में कुल 65 राजनीतिक दल अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला मौजूदा राजनीतिक दिग्गजों और नई लहर के नेताओं के बीच माना जा रहा है. काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर से राजनेता बने 35 वर्षीय बालेन शाह, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से हैं, प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में से एक बनकर उभरे हैं.
उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं सीपीएन-यूएमएल के 74 वर्षीय नेता के.पी. शर्मा ओली, जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में हैं. इनके अलावा नेपाली कांग्रेस के 49 वर्षीय गगन थापा और तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके माओवादी केंद्र के पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' भी दौड़ में शामिल हैं.
चुनाव के मुख्य मुद्दों में भ्रष्टाचार के अलावा रोजगार और गरीबी जैसे गंभीर विषय शामिल हैं. साथ ही, भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ नेपाल के संबंधों का संतुलन भी चर्चा के केंद्र में है.
जहाँ भारत नेपाल के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा संभालता है, वहीं चीन भी अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत कर रहा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल की जनता विकास और स्थिरता के लिए किस पर भरोसा जताती है.