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ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति भारत से चुराई संपत्ति से

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17 जुल. 2025, 02:02 AM 3 मिनट में पढ़ें 4

NCERT
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नई दिल्ली । डेस्क: नई NCERT पाठ्यपुस्तक के अनुसार ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भारत की संपत्ति को लूटा और शोषण किया था. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, जारी की है.


इस पाठ्यपुस्तक में यूरोपीय शक्तियों, विशेष रूप से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, को भारत की संपत्ति को लूटने और शोषण करने वाला बताया गया है.

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पुस्तक के चौथे अध्याय, "औपनिवेशिक शासन और भारत", में कहा गया है कि ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति को भारत से "चुराई गई संपत्ति" ने संभव बनाया. अमरीकी इतिहासकार विल ड्यूरेंट के हवाले से पुस्तक में लिखा है कि "ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के लिए आवश्यक निवेश, कम से कम आंशिक रूप से, भारत से लूटी गई संपत्ति से आया."


NCERT के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम समूह के प्रमुख मिशेल डैनिनो ने कहा, "ब्रिटेन का भारत पर प्रभुत्व लूट, शोषण, व्यापारिक वर्चस्व, विदेशी शैक्षिक, प्रशासनिक और न्यायिक प्रणालियों का थोपना, और ईसाईकरण था."


पुस्तक में भारतीय अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के अनुमान का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि 1765 से 1938 के बीच भारत से 45 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की संपत्ति निकाली गई, जो 2023 में ब्रिटेन के जीडीपी का लगभग 13 गुना है. इस संपत्ति को न केवल भारी करों के माध्यम से, बल्कि रेलवे, टेलीग्राफ नेटवर्क और औपनिवेशिक शासकों द्वारा लड़े गये युद्धों के खर्च के लिये भारतीयों पर लगाए गये शुल्कों के जरिये भी निकाला गया.


पुस्तक में औपनिवेशिक काल को अक्सर सकारात्मक रूप में चित्रित करने की प्रवृत्ति को चुनौती दी गई है. डैनिनो ने कहा, "भारत में औपनिवेशिक काल को अक्सर सकारात्मक बताया जाता है, जिसमें ब्रिटिशों द्वारा उद्योग, रेलवे, टेलीग्राफ और आधुनिक शिक्षा लाने की बात कही जाती है. हमने इस दृष्टिकोण को सुधारने की कोशिश की है, यह दिखाते हुए कि वास्तव में क्या हुआ. स्वदेशी उद्योगों और शैक्षिक प्रणालियों का विनाश, भारतीय आबादी से भारी राजस्व वसूली, और रेलवे व टेलीग्राफ के वित्तपोषण के लिये भारतीयों पर बोझ डालना."


हालांकि, पुस्तक में औपनिवेशिक काल के कुछ सकारात्मक पहलुओं को भी शामिल किया गया है, जैसे भारत का विश्व से जुड़ाव और यूरोप द्वारा भारत की प्राचीन संस्कृति की खोज. NCERT ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "इस पाठ्यपुस्तक में प्रस्तुत सभी तथ्य प्रसिद्ध प्राथमिक और द्वितीयक शैक्षणिक स्रोतों पर आधारित हैं. फिर भी, किसी भी तरह के पूर्वाग्रह या गलतफहमी से बचने के लिये, पेज 20 पर 'इतिहास के अंधेरे दौर पर एक नोट' जोड़ा गया है." इस नोट में कहा गया है, "इन घटनाओं को मिटाया या नकारा नहीं जा सकता, लेकिन आज किसी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत होगा."


पुस्तक में पुर्तगाली और फ्रांसीसी औपनिवेशिक गतिविधियों का भी उल्लेख है. इसमें पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा द्वारा भारतीय व्यापारियों को बंदी बनाने, यातना देने और हत्या करने, साथ ही कैलिकट पर समुद्र से बमबारी करने का जिक्र है. पुर्तगाली शासन को हिंदुओं, मुसलमानों, यहूदियों और ईसाई धर्मांतरितों के खिलाफ धार्मिक उत्पीड़न के लिये जाना जाता था. इसके अलावा, 1748 में फ्रांसीसी भारत के गवर्नर जनरल जोसेफ फ्रांस्वा डुप्ले द्वारा पांडिचेरी के मूल वेदपुरीश्वरम मंदिर के विनाश का भी उल्लेख किया गया है.


पुस्तक में यह भी बताया गया है कि ब्रिटिशों ने ग्रामीण समुदायों की स्वदेशी शासन प्रणालियों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर एक केंद्रीकृत नौकरशाही लागू की. इसमें कहा गया है, "आधुनिकीकरण के रूप में प्रस्तुत इस विदेशी प्रणाली ने भारतीयों को उनकी न्यायिक व्यवस्था से अलग कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप महंगे, समय लेने वाले और विदेशी भाषा में संचालित होने वाले न्यायालय स्थापित हुये."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP