नायरा एनर्जी ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, सरकारी कंपनियां कब घटाएंगी?
मुंबई । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का फायदा आखिरकार निजी तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को देना शुरू कर दिया है. देश की प्रमुख निजी ईंधन कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने बुधवार से पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की है. पिछले दो सालों से अधिक समय में यह पहली बार है जब किसी तेल कंपनी ने खुदरा बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाकर जनता को राहत दी है.
लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि देश के करीब 90 फीसदी बाजार पर कब्जा जमाए बैठीं इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी कीमतें कब घटाएंगी?
मुंबई मुख्यालय वाली और रूसी तेल दिग्गज रोसनेफ्ट के सहयोग से चलने वाली नायरा एनर्जी ने गुजरात के वाडिनार स्थित अपनी रिफाइनरी (क्षमता 4 लाख बैरल प्रतिदिन) के दम पर देश भर के अपने 7,000 से अधिक पंपों पर नई दरें लागू कर दी हैं.
हालांकि, स्थानीय करों (वैट) के कारण अलग-अलग राज्यों में यह कटौती थोड़ी कम-ज्यादा हो सकती है. पर इस कदम ने सरकारी तेल कंपनियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि दिल्ली सहित देश के बड़े हिस्से में आज भी इंडियन ऑयल के पंपों पर पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के पुराने ऊंचे स्तर पर ही बिक रहा है.
बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम काफी नीचे आ चुके हैं. जब ईरान संकट के समय मार्च में वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी, तब नायरा एनर्जी ने तुरंत (26 मार्च को) पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 3 रुपये बढ़ा दिए थे.
अब जैसे ही बाजार में नरमी आई, कंपनी ने जिम्मेदारी दिखाते हुए दाम वापस ले लिए.
इसके विपरीत, सरकारी तेल कंपनियों का रवैया समझ से परे है. कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर मई के दूसरे पखवाड़े में इन सरकारी कंपनियों ने आम जनता पर बोझ डालते हुए कई बार में दाम बढ़ाए थे. लेकिन अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थितियां सुधर चुकी हैं, और यहां तक कि देश में विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में भी 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती हो चुकी है, तब भी सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां अपनी पुरानी दरों पर अड़ी हुई हैं.
देश के कुल 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90% से ज्यादा सरकारी क्षेत्र के पास हैं. ऐसे में आम जनता को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब ये सरकारी कंपनियां भी निजी क्षेत्र की तर्ज पर कीमतों में कटौती की घोषणा करेंगी. अब देखना यह है कि वैश्विक बाजार की इस गिरावट का फायदा सरकारी कंपनियां आम उपभोक्ताओं को कब तक पास करती हैं.