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मुहम्मद यूनुस मुझे फांसी देगा? बल्कि मैं उसे फांसी दूंगी- शेख हसीना

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19 नव. 2025, 02:46 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

शेख हसीना
शेख हसीना

कोलकाता । डेस्क: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनने के बाद भी उनके समर्थक हार मानने को तैयार नहीं हैं. कोलकाता में शरण लिए हुए आवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि हसीना न केवल टूटेगी नहीं, बल्कि 'युद्ध' के लिए कमर कस रही हैं. सोमवार को विशेष अदालत द्वारा हसीना को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद उनके अनुयायी शुरुआत में मायूस हो गए थे, लेकिन मंगलवार को हसीना के एक फोन कॉल ने उन्हें नई ऊर्जा दे दी.


समाचार एजेंसी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सजा की खबर मिलते ही कोलकाता के उनके साथी एक-दूसरे से फोन पर रो रहे थे. वे सोच रहे थे कि 'सब कुछ खत्म हो गया, अब कोई उम्मीद नहीं बची.' लेकिन मात्र पांच मिनट बाद हसीना ने खुद एक नेता को फोन किया. फोन पर हसीना ने कहा, "मेरी गर्दन में फांसी का फंदा डाल दिया, लेकिन तुम लोगों ने एक फोन तक नहीं किया?" नेता ने झेंपते हुए जवाब दिया कि वे फोन करना चाहते थे, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाए. 


इस पर हसीना ने साफ लहजे में कहा, "मुहम्मद यूनुस मुझे फांसी देगा? बल्कि मैं उसे फांसी दूंगी! अल्लाह ने मुझे व्यर्थ नहीं बचाया. ग्रेनेड हमले में भी मेरी जान नहीं गई."


इस बातचीत ने कोलकाता के आवामी लीग नेतृत्व को गहराई से प्रभावित किया. वे मानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पहले से ही इस फैसले को खारिज कर चुका है और बांग्लादेश में जनाक्रोश तेज हो रहा है. जुलाई के विद्रोह और उसके बाद की हिंसक घटनाओं को वे 'जनरोष' ही बताते हैं, हालांकि स्वीकार करते हैं कि पार्टी को अपनी गलतियों का अहसास हुआ है. एक नेता ने कहा, "हम पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहते. जो हो गया, सो हो गया. अब आगे देखना है. हसीना ने हमें ताकत दी है. यूनुस के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है, सजा के बाद यह और बढ़ेगा."


आशावादी नेताओं का मानना है कि बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव में आवामी लीग के साथ-साथ जातीय पार्टी और 14 दलों के गठबंधन को वोटिंग से रोके जाने से एक 'अघोषित गठबंधन' बनेगा. कादेर सिद्दिकी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनका दल चुनाव से दूर रहेगा. आवामी लीग का तर्क है कि बिना उनकी भागीदारी के चुनाव होने पर नई सरकार को 'वैधता' मिल जाएगी, जो उनके वापसी को और मुश्किल बना देगी. जुलाई विद्रोह से पहले देश में जो 'जनरोष' पैदा हुआ था, उसी से प्रेरणा लेते हुए वे कहते हैं, "हमारी ताकत अभी कम है, लेकिन हमारे लोग बांग्लादेश में हैं. स्थिति बदलेगी."


जुलाई विद्रोह के बाद आवामी लीग का बड़ा नेतृत्व कोलकाता में शरणार्थी की तरह रह रहा है. वे कब देश लौटेंगे, यह नहीं जानते. निजी बातचीत में वे मानते हैं कि पार्टी का जनता से संपर्क टूट गया था और विद्रोह की भनक भी नहीं लगी. फिर भी, हसीना की ताकतवर बातों ने उन्हें आशावादी बना दिया है. एक नेता ने कहा, "हसीना ने बहुत बड़ी बात कही. हम टूट चुके थे, उन्होंने हमें जोड़ा. अब हम युद्ध के लिए तैयार हैं."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP