जहरीला कफ सिरप: बलि का बकरा न बनाएं, असली दोषियों को फांसी दो
'जहरीला' कफ: 'बलि का बकरा न बनाएं, असली दोषियों को फांसी दो'
भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' से 22 बच्चों की मौत के मामले में डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी के विरोध में राज्य भर के हज़ारों डॉक्टरों ने प्रदर्शन दर्ज कराया है. डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि डॉ. सोनी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि जहरीली दवा बनाने वाले असली दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
राज्य के विभिन्न चिकित्सक संगठनों से जुड़े इन मेडिकल कर्मियों ने शुक्रवार को अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, हालांकि उन्होंने अपना नियमित कार्य जारी रखा.
डॉक्टरों ने दावा किया कि विवादित कफ सिरप में जहरीला औद्योगिक विलायक (Industrial Solvent) मिला हुआ था. पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ऑफ एमपी (PMTAMP) के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय और महासचिव डॉ. अशोक ठाकुर ने सवाल किया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) क्या कर रहा था.
उन्होंने कहा, "उन्हें मुकदमा चलाने के बजाय, एक डॉक्टर को बलि का बकरा बना दिया गया है. उन्हें आधी रात को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है."
डॉक्टरों का कहना है कि डॉ. सोनी ने गरीब और आदिवासी क्षेत्र के लोगों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह सस्ती दवा लिखी थी, जो 30 से अधिक वर्षों से लिखी जा रही थी.
उन्होंने मांग की है कि मिलावटी दवा बनाने वालों के लिए मृत्युदंड का कानून बनाया जाए और दवा आपूर्ति में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इस तरह की गिरफ्तारी से दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले डॉक्टरों का मनोबल टूटेगा और लोगों का डॉक्टरों पर से विश्वास उठ जाएगा.
मृत 22 बच्चों में से अधिकांश छिंदवाड़ा से थे. जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) नामक अत्यधिक जहरीला यौगिक मिला था. इस रिपोर्ट के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था.
इस बीच, सिरप बनाने वाली कंपनी स्रेसन फार्मा के मालिक जी. रंगनाथन को मध्य प्रदेश की एक विशेष जांच दल (SIT) ने 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.