अक्टूबर में सर्वाधिक गुणवत्ताहीन दवायें मिली, छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट नदारत
नई दिल्ली । डेस्क: अक्टूबर माह में देश में सबसे ज्यादा गुणवत्ताहीन दवाएं मिली हैं जबकि छत्तीसगढ़ सहित 14 राज्यों ने अपनी जांच रिपोर्ट CDSCO के पास जमा नहीं की है. जाहिर है कि यदि 14 राज्यों की रिपोर्ट जमा हो जाती तो यह आंकड़ा और ज्यादा का होता. इसी के साथ लाख टके का सवाल है कि जिन लोगों ने इन दवाओं का सेवन कर लिया है उनका हाल क्या है उसका पता कैसे चलेगा. इस तरह से बगैर जांच के जीवनरक्षक तथा आवश्यक दवाओं को बाजार में प्रवेश करने की अनुमति देने से मरीजों का ही नुकसान होगा. बता दें कि पिछले माह मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप से कई बच्चों की मौत हो गई थी.
भले ही लगभग 14 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) ने अपनी 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) दवा नमूनों का डेटा जमा नहीं किया, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अक्टूबर 2025 के महीने में NSQ दवाओं की सबसे अधिक संख्या दर्ज की है.
अक्टूबर 2025 में कुल 211 नमूनों को NSQ घोषित किया गया, जो 2025 के पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक है. इस महीने राज्यों ने भी सबसे अधिक 148 दवा नमूनों को NSQ रिपोर्ट किया, जो CDSCO द्वारा सूचीबद्ध कुल NSQ नमूनों का लगभग 70% है. राज्यों की ओर से यह बढ़ी हुई भागीदारी देशभर में बेहतर दवा निगरानी और NSQ के खिलाफ कार्रवाई का संकेत देती है.
CDSCO के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीनों में राज्यों द्वारा रिपोर्ट किए गए NSQ नमूनों की संख्या इस प्रकार रही: जनवरी में कुल 145 में से 93, फरवरी में 103 में से 56, मार्च में 131 में से 61, अप्रैल में 196 में से 121, मई में 188 में से 130, जून में 184 में से 103, जुलाई में 143 में से 97, अगस्त में 94 में से 60, और सितंबर में 112 में से 60.
अक्टूबर में, कर्नाटक की राज्य प्रयोगशाला ने लगभग 30 दवा नमूनों को NSQ बताया, जिसके बाद तमिलनाडु ने 19 नमूने (कान्चीपुरम स्थित स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स के कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप का एक मिलावटी नमूना सहित) रिपोर्ट किए. पंजाब ने लगभग 16 NSQ, इसके बाद राजस्थान (15), बिहार (14) और केरल (12) रिपोर्ट किए.
CDSCO ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित 14 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली; दमन और दीव, लद्दाख, और लक्षद्वीप) से NSQ सूचियाँ अभी भी लंबित हैं. इस लंबित सूची में छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, ओडिशा और मेघालय भी शामिल हैं, हालांकि इनमें से कुछ राज्यों ने अक्टूबर के महीने में NSQ की सूचना दी है.
राज्यों और केंद्रीय प्रयोगशालाओं द्वारा NSQ पाए गए कुछ दवा नमूनों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स की पैरासिटामोल टैबलेट iP 500 mg, ज़ायडस हेल्थकेयर का डेक्सामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन IP (Dexona), अल्केम हेल्थ साइंस का एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लावुलनेट टैबलेट I.P. (Clavam-625), अल्केम लेबोरेटरीज का एमलोडीपाइन बेसिलाइट टैबलेट IP 5 mg (Amlogen-5), गुफिक बायोसाइंसेज का लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन 50 mg (Gufisome), और ब्रह्मानंद आयुर्वेद (OPC) प्राइवेट लिमिटेड, पंजाब का कामराज कैप्सूल (संदिग्ध सिल्डेनाफिल और टैडालफिल सामग्री के लिए) शामिल हैं.
NSQ परिणामों की रिपोर्टिंग में इस साल उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. इस साल के पहले दस महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 929 NSQ रिपोर्ट किए गए, जबकि 2024 के पूरे 12 महीनों में यह संख्या कुल 339 थी. CDSCO ने स्पष्ट किया है कि किसी दवा के नमूने को NSQ घोषित करना विशिष्ट बैच के परीक्षण किए गए उत्पाद की गुणवत्ता मानकों में विफलता पर आधारित होता है और इससे बाज़ार में उपलब्ध अन्य दवा उत्पादों पर चिंता की आवश्यकता नहीं होती है. (symbolic photo)