तहसीलदार से मारपीट मामले में MLA समर्थकों का सरेंडर
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस सियासी और प्रशासनिक घमासान के बीच, बुधवार को मामले के दो आरोपी युवकों (विधायक समर्थकों) ने सीतापुर थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी करने और चेकलिस्ट पर हस्ताक्षर कराने के बाद दोनों को मुचलके पर रिहा कर दिया है.
जिन युवकों ने सरेंडर किया है, उनकी पहचान नाजिम राजा और पंकज गुप्ता के रूप में हुई है. हालांकि, इस मामले में मुख्य आरोपी और स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो ने पहले खुद गिरफ्तारी देने की बात कही थी, लेकिन वे बुधवार को थाने नहीं पहुंचे.
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है. पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरगुजा कलेक्टर से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है. कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. तहसीलदारों की हड़ताल के कारण जनता परेशान है और राजस्व से जुड़े सारे काम ठप पड़े हैं. आगामी 15 जून से सीमांकन का कार्य भी बंद होने वाला है.
विपक्ष ने सरकार और प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है.
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 27 मई को सीतापुर के राजापुर में शुरू हुआ था, जहां नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की गई थी. पीड़ित अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता समेत करीब 10 अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (221, 221(1), 132 और 191(2)) के तहत मामला दर्ज किया है.
इस घटना के विरोध में राज्यभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार बीते 28 मई से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर हैं, जिससे सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
दूसरी तरफ, इस मामले में एक नया मोड़ भी सामने आया है. विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन सीमा धनकी, जो कि एक मितानिन हैं, उन्होंने भी नायब तहसीलदार तुषार मानिक पर गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई है.
बुधवार को बड़ी संख्या में मितानिनों ने एकजुट होकर सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन दिया और नायब तहसीलदार के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की. इससे पहले मंगलवार को भी सत्ताधारी दल के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अधिकारी के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिससे यह मामला प्रशासनिक के साथ-साथ अब पूरी तरह से दो पक्षों की साख की लड़ाई बन चुका है.