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चंद्रमा पर 2032 में उल्कापिंड टकराने की संभावना!

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22 दिस. 2025, 06:32 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

चंद्रमा से टक्कर
चंद्रमा से टक्कर

वाशिंगटन । डेस्क: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि एक प्रचंड आकार का उल्कापिंड '2024-YR4' ठीक सात साल बाद, यानी 2032 में चंद्रमा से टकरा सकता है. पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा के साथ इस संभावित टक्कर का परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे एक तीव्र विस्फोट होगा, जिसकी चमक पृथ्वी से भी नजर आ सकती है. 


मल्टीपल स्पेस टेलीस्कोपों के डेटा विश्लेषण से यह भविष्यवाणी की गई है. जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, उल्कापिंड की गति पर निगरानी और चर्चाएं तेज हो रही हैं.

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यह उल्कापिंड पहली बार 2024 में खोजा गया था. शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा था कि यह सीधे पृथ्वी से टकराएगा, जिसकी संभावना लगभग 3.1 प्रतिशत थी. लेकिन बाद के विश्लेषण से पृथ्वी से टकराव की संभावना घटी और चंद्रमा से टक्कर की संभावना बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई. 


कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टक्कर हुई, तो विस्फोट से छोटे-छोटे उल्का टुकड़े बनेंगे, जो पृथ्वी की ओर आ सकते हैं. इससे कृत्रिम उपग्रहों को नुकसान पहुंच सकता है, हालांकि इसकी संभावना फिलहाल मात्र 1 प्रतिशत है. नासा के इंजीनियर ब्रेंट बार्बर ने चिंता जताते हुए कहा, "YR4 पृथ्वी की कक्षा में घूमने वाले विभिन्न वस्तुओं को नुकसान पहुंचा सकता है. हमें अभी से सतर्क हो जाना चाहिए."


उल्कापिंड का सटीक आकार या वजन अभी अज्ञात है, लेकिन अनुमान के मुताबिक यह कम से कम 60 मीटर चौड़ा है. यदि भविष्यवाणी सही साबित हुई, तो 2032 के 22 दिसंबर को चंद्रमा से टक्कर हो सकती है. इस विस्फोट की तीव्रता जापान के हिरोशिमा परमाणु बम विस्फोट से 400 गुना अधिक हो सकती है, जो 60 लाख मीट्रिक टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा छोड़ेगा.


वैज्ञानिकों ने गणना की है कि टक्कर चंद्रमा के किस हिस्से पर हो सकती है. पृथ्वी की ओर मुख वाले हिस्से पर टकराव की संभावना 86 प्रतिशत है. ऐसे में पृथ्वी से विस्फोट की चमक देखी जा सकेगी, हालांकि यह स्थानीय मौसम और बादलों पर निर्भर करेगा. 


अमेरिकी अंतरिक्ष वैज्ञानिक पैट्रिक किंग ने कहा, "पृथ्वी से चंद्रमा पर इस ऐतिहासिक विस्फोट की चमक को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता." उनके शोध के अनुसार, अमेरिका के विभिन्न हिस्सों, खासकर हवाई द्वीपसमूह और पश्चिमी तट के निवासियों को यह दुर्लभ दृश्य नजर आ सकता है.


फिलहाल सब कुछ अनुमान पर आधारित है. टक्कर से पहले ही वैज्ञानिक उल्कापिंड को नष्ट करने की योजना बना रहे हैं. सटीक आकार और वजन पता चलने पर इसे उसके रास्ते में ही उड़ाने की कोशिश की जा सकती है. नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप 2026 के फरवरी में इसे एक बार ऑब्जर्व करेगा, जिससे अधिक डेटा मिलेगा.


उल्कापिंड को अंतरिक्ष में ही नष्ट करने के तरीके पर ब्रेंट बार्बर का मानना है कि पृथ्वी से कोई शक्तिशाली वस्तु भेजकर इसे तोड़ा जा सकता है. परमाणु विस्फोट भी एक विकल्प है, लेकिन इसके लिए सटीक गणना जरूरी है. 


विशेषज्ञों के अनुसार, टक्कर से कम से कम तीन महीने पहले इसे नष्ट करना होगा, ताकि उसके मलबे पृथ्वी तक न पहुंचें. गलत गणना से पृथ्वी पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है. अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अगले कुछ वर्षों में विशेष अंतरिक्ष मिशन भेजने की योजना बनाई है, जिसे तुरंत शुरू करने की जरूरत है.


यह घटना न केवल वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है, बल्कि पूरी मानवजाति के लिए सतर्कता का संदेश भी. अंतरिक्ष निगरानी को मजबूत करने और आपदा प्रबंधन पर वैश्विक सहयोग बढ़ाने का समय आ गया है. (Symbolic Photo)  

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP