नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर मेडिकल संचालक को 15 साल जेल
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में प्रतिबंधित नशीली दवाओं और इंजेक्शन के अवैध कारोबार के मामले में विशेष न्यायालय (NDPS एक्ट) ने कड़ा फैसला सुनाया है. विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने जनपद पारा रोड स्थित दर्श मेडिकल स्टोर के संचालक देवेश जायसवाल को दोषी करार देते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.
इसके साथ ही दोषी पर 1.5 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने की स्थिति में उसे अतिरिक्त एक साल जेल में बिताने होंगे.
यह पूरा मामला फरवरी 2024 का है, जब पुलिस और औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर उक्त मेडिकल स्टोर पर दबिश दी थी. जांच के दौरान दुकान के काउंटर और स्टोर रूम से भारी मात्रा में अल्प्राजोलम टैबलेट और बूप्रेनोरफीन के इंजेक्शन बरामद किए गए थे.
चौंकाने वाली बात यह थी कि इन दवाओं को बिना किसी वैध डॉक्टर के पर्चे के युवाओं को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था. कार्रवाई के दौरान आरोपी देवेश जायसवाल मौके से फरार हो गया था, जिसने बाद में कानून के शिकंजे से बचने का रास्ता न देख आत्मसमर्पण कर दिया था.
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और समाज पर इसके घातक प्रभाव को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने स्पष्ट किया कि एक लाइसेंसधारी मेडिकल संचालक द्वारा अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग कर नशे का जाल फैलाना एक अक्षम्य अपराध है.
हालांकि, इस मामले में आरोपी की पत्नी ज्योति जायसवाल को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया है. एनडीपीएस की धारा 22(सी) के तहत आई इस सजा को क्षेत्र में नशे के सौदागरों के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.