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कोलकाता में शहीद दिवस: TMC के दो धड़ों और कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन

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21 जुल. 2026, 07:35 AM 3 मिनट में पढ़ें 5

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 21 जुलाई का 'शहीद दिवस' इस बार एक नए दौर में प्रवेश कर गया है. मंगलवार को कोलकाता के मध्य व्यावसायिक क्षेत्र में महज 2.5 किलोमीटर के दायरे में तीन अलग-अलग राजनीतिक खेमों ने अपने-अपने कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिससे पूरे शहर में राजनीतिक सरगर्मी और सुरक्षा दोनों ही चरम पर पहुंच गईं.


यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि हाल ही में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है और तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद पहला शहीद दिवस मनाया जा रहा है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला धड़ा बिड़ला तारामंडल के पास कैथेड्रल रोड पर अपना कार्यक्रम कर रहा है, जिसके लिए उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति मिली थी. 

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वहीं, विपक्षी नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी धड़ा, जो खुद को "असली तृणमूल कांग्रेस" होने का दावा करता है, मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास अपनी रैली आयोजित कर रहा है. इसके अलावा, कांग्रेस ने शहीद मीनार के पास एक अलग कार्यक्रम का आयोजन किया है.


सोमवार रात को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने आरोप लगाया कि उनके मंच, बैनर और साउंड सिस्टम में तोड़फोड़ की गई है. इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ पूरी रात धरना स्थल पर ही रुकी रहीं. 


आधी रात के आसपास समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार और पुलिस उनके कार्यकर्ताओं और 1993 के शहीदों के परिवारों को कार्यक्रम में शामिल होने से रोक रही है. उन्होंने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी तत्वों और पुलिस की मदद से इस आयोजन को बाधित करने की कोशिश की जा रही है.


दूसरी ओर, भाजपा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. राज्य मंत्री दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के धरने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह शहीदों को श्रद्धांजलि देने का मंच है, न कि विरोध प्रदर्शन का. उन्होंने कहा कि तृणमूल नेताओं ने शहीदों के परिवारों और जनता के साथ विश्वासघात किया है और अब जनता उनके साथ नहीं है.


इस बार शहीद दिवस की महत्ता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि राज्य सरकार ने 1993 के गोलीकांड पर बनी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रख दिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए सालों तक इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को दबाकर रखा.


1993 में राइटर्स बिल्डिंग के घेराव के दौरान पुलिस की गोलीबारी में यूथ कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी, जिसके बाद से ममता बनर्जी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती आ रही हैं. 


इस बार तीन बड़े आयोजनों को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय बलों के करीब 1,000 जवानों को तैनात किया है. ड्रोन कैमरों के जरिए तीनों स्थलों पर नजर रखी जा रही है और मध्य कोलकाता के प्रमुख रास्तों जैसे रेड रोड, मेयो रोड और कैथेड्रल रोड पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP