भारत में माओवादी हिंसा में कमी नहीं- SATP
भारत में माओवादी हिंसा और सरकार की कठोर नीति
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादी हिंसा और सरकार की जवाबी कार्रवाई एक जटिल और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को दर्शाती है. साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में माओवादियों द्वारा की गई हिंसक घटनाओं में कमी नहीं आई है, भले ही सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा हो.
SATP, जो इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट द्वारा संचालित एक गैर-लाभकारी संगठन है, दक्षिण एशिया में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर निरंतर शोध करता है. यह संस्थान 1997 में नई दिल्ली में स्थापित किया गया था.
SATP के आंकड़ों के अनुसार, 27 जुलाई, 2025 तक, वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों में माओवादियों ने कम से कम 60 लोगों (35 नागरिक और 25 सुरक्षाकर्मी) की हत्या की है.
पिछले साल (2024) की समान अवधि में 61 लोग मारे गए थे, जबकि 2024 के बाकी समय में 40 और लोग मारे गए. 20 जनवरी, 2024, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन साल के भीतर नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का दावा किया था, तब से अब तक माओवादियों ने 156 लोगों की जान ली है.
हाल की कुछ घटनाओं ने माओवादियों की क्रूरता को उजागर किया है. 20 जुलाई, 2025 को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (CPI-Maoist) के 4-5 अज्ञात कैडरों ने दो ग्रामीणों, कवासी जोगा (55) और मंगलू कुर्सम (50) की धारदार हथियारों से हत्या कर दी. माओवादियों के जगारगुंडा समिति ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि दोनों ग्रामीण "पुलिस मुखबिर" थे. इसी तरह, 16 जुलाई, 2025 को बीजापुर के उसूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में कवासी हुंगा (38) की माओवादियों ने हत्या कर दी. एक अन्य घटना में, झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया पुलिस स्टेशन क्षेत्र में माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान, परनेश्वर कोच, शहीद हो गए, जबकि दो माओवादी भी मारे गए.
इन घटनाओं से साफ है कि माओवादी अपनी हिंसक रणनीति पर अडिग हैं, भले ही वे शांति वार्ता और युद्धविराम की मांग करते रहें. SATP के अनुसार, 20 जनवरी, 2024 से 27 जुलाई, 2025 तक, माओवादियों ने 78 विस्फोटक हमले, 13 आगजनी की घटनाएँ, और 176 बार सुरक्षाबलों के साथ गोलीबारी की. इसके अलावा, उन्होंने देशभर में कम से कम आठ बार बंद का आह्वान किया.
माओवादियों की रणनीति में बदलाव भी देखा गया है. मई 2025 में उनके शीर्ष नेता, नंबाला केशव राव उर्फ बसवा राजू, के मारे जाने के बाद, CPI-Maoist की केंद्रीय समिति ने 28 मई, 2025 को शांति वार्ता की पेशकश की, बशर्ते सरकार नक्सल विरोधी अभियान रोके और नए सशस्त्र बल शिविरों की स्थापना बंद करे. अप्रैल 2025 में भी उन्होंने इसी तरह की अपील की थी, लेकिन केंद्र सरकार से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. दूसरी ओर, तेलंगाना में विभिन्न राजनीतिक दलों, जन संगठनों, और मानवाधिकार समूहों ने तत्काल वार्ता की मांग को लेकर प्रदर्शन किए.
बदली रणनीति और चुनौतियाँ
माओवादी अब छोटे समूहों में काम कर रहे हैं और अपने शीर्ष नेताओं को पकड़े जाने या मुठभेड़ से बचाने के लिए दुर्गम इलाकों में ठिकाने बदल रहे हैं. खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, बसवा राजू की मौत के बाद माओवादी दक्षिण बस्तर के दुर्गम इलाकों, विशेष रूप से इंद्रावती पार्क क्षेत्र, में चले गए हैं. इस क्षेत्र में सड़कों और अग्रिम चौकियों की कमी के कारण सुरक्षाबलों के लिए अभियान चलाना मुश्किल है. माओवादियों ने स्थानीय लोगों के बीच सादे कपड़ों में घुलमिलने की रणनीति भी अपनाई है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की 4 जुलाई, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, माओवादियों के ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) और समर्थक उगाही और कैडरों को शरण देने में सक्रिय हैं. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के एक माओवादी कार्यकर्ता, राजेश दियोगम, से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि माओवादी केंद्रीय क्षेत्र में उगाही, हथियार संग्रह, और अन्य गतिविधियों को तेज करने की योजना बना रहे हैं.
16 जुलाई, 2025 की एक रिपोर्ट में CPI-Maoist ने स्वीकार किया कि पिछले एक साल में 357 माओवादी मारे गए, जिनमें 136 महिलाएँ शामिल थीं. उनके 23 जून, 2025 के 22-पेज के दस्तावेज में कहा गया कि यह नुकसान गलत रणनीति और गुरिल्ला युद्ध के नियमों का पालन न करने के कारण हुआ. दस्तावेज में "हवा" और "बहते पानी" की तरह लगातार गतिशील रहने और छोटे समूहों में काम करने की रणनीति पर जोर दिया गया.
सरकार का कठोर रुख
माओवादियों से शांति वार्ता के प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 जून, 2025 को स्पष्ट किया कि हथियारबंद माओवादियों से कोई बातचीत नहीं होगी. उन्होंने माओवादियों से हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की, अन्यथा 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प दोहराया. 20 जनवरी, 2024 से अब तक सुरक्षाबलों ने 573 नक्सलियों को मार गिराया, 713 को गिरफ्तार किया, और 1,417 के आत्मसमर्पण करवाए.
SATP का अनुमान है कि माओवादी केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के 43 में से 30 सदस्य अब निष्क्रिय हो चुके हैं. फिर भी, माओवादी अपनी रणनीति को बदलकर जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार का आक्रामक दृष्टिकोण नक्सलवाद को कमजोर कर रहा है, लेकिन यह स्थानीय आबादी में असंतोष भी पैदा कर सकता है, जो भविष्य में नए विद्रोह को जन्म दे सकता है.