छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर बड़ा नक्सल ऑपरेशन, मारा गया हिड़मा
जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे घने जंगलों में चल रहे बड़े नक्सल ऑपरेशन के दौरान सबसे ज़्यादा वांछित माओवादी कमांडरों में शुमार माड़वी हिड़मा के मारे जाने की खबर सामने आई है. माना जा रहा है कि इस मुठभेड़ में हिड़मा के साथ उसकी दूसरी पत्नी राजे ऊर्फ राजक्का भी मारी गई है.
जानकारी के मुताबिक, सीमा इलाके के कई हिस्सों में सुबह से गोलियों की आवाज़ गूंजती रही. सुरक्षा बलों ने लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया. कई स्थानों पर नक्सल मोर्चे पर मुठभेड़ की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कम से कम 6 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. इसी दौरान, माड़वी हिड़मा के मारे जाने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट कर दिया.
लगभग 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ति गांव में जन्मे माड़वी हिड़मा ऊर्फ संतोष को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य माना जाता था. वह माओवादियों की सबसे घातक हमलावर इकाई-पीएलजीए बटालियन नंबर 1, का प्रमुख था.
बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी तक पहुंचने वाला वह अकेला आदिवासी चेहरा था, जिसने जंगलों से सीधे नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी पकड़ बना ली थी. उसके सिर पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और सुरक्षा बल कई सालों से उसकी तलाश में थे.
हिड़मा की भूमिका: खून से सनी लंबी हिंसक विरासत
हिड़मा पर कम से कम 26 बड़े और घातक नक्सली हमलों की साज़िश रचने और उन्हें अंजाम देने का आरोप है. इनमें कई ऐसी घटनाएँ शामिल हैं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया था-
2010 दंतेवाड़ा हमला
दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे. इसे भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना जाता है.
2013 झीरम (दरभा) घाटी नरसंहार
2013 में झीरम घाटी (दरभा घाटी) में हुए नक्सली हमले में 27 लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें कई शीर्ष कांग्रेसी नेता शामिल थे. यह हमला न केवल बस्तर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बड़ा सदमा था.
2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़
2021 में सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 22 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए थे. इस हमले में भी हिड़मा की भूमिका बताई गई थी और इसके बाद से वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिक लक्ष्य बन गया था.
पत्नी राजे भी मुठभेड़ में मारी गई
सूत्रों के अनुसार, जिस मुठभेड़ में हिड़मा मारा गया, उसी में उसकी दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी ढेर हो गई. बताया जाता है कि वह भी नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थी और हिड़मा के निकटतम सर्कल का हिस्सा मानी जाती थी.
माड़वी हिड़मा का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है. वह न केवल हमलों की योजना बनाने वाला मास्टरमाइंड था, बल्कि कमांडर के तौर पर ज़मीन पर मोर्चा संभालने और हमला करने के लिए भी बदनाम था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि हिड़मा के खात्मे से बस्तर और आसपास के इलाकों में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियाँ सावधानी बरतते हुए आगे भी सर्च और डॉमिनेशन ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं, ताकि उसके समर्थकों और बचे हुए दस्ता सदस्यों पर भी कार्रवाई की जा सके.