मनीष कुंजाम की चेतावनी: सरेंडर नक्सलियों और ग्रामीणों में टकराव संभव
दंतेवाड़ा । संवाददाता: बस्तर के आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने क्षेत्र में सक्रिय नक्सली आंदोलन और हालिया आत्मसमर्पण की घटनाओं पर तीखा प्रहार किया है. कुंजाम ने दो टूक शब्दों में कहा कि बड़े नक्सली नेताओं का पुलिस के सामने आना कोई 'पुनर्वास' नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए किया गया 'सरेंडर' है.
उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक हिंसा का रास्ता चुनने वाले इन नेताओं ने कभी जल, जंगल और जमीन की वास्तविक लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि बस्तर की संपदा को लूटने का काम किया.
कुंजाम ने नक्सलियों की आर्थिक गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाल ही में बरामद हुए सोने के बिस्किट और भारी नकदी इस बात का प्रमाण हैं कि यह आंदोलन पूरी तरह भटक चुका था.
उन्होंने दावा किया कि बरामद सोने पर विदेशी बैंकों की मुहर होना एक गंभीर विषय है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए. उनके अनुसार, सोनू, रूपेश और चैतू जैसे बड़े नामों के खात्मे के बाद अब सुकमा और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद अंतिम सांसे ले रहा है.
पूर्व विधायक ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि आमदई और रावघाट जैसी खदान परियोजनाओं में ग्रामीणों को मोहरा बनाकर किए गए आंदोलन असल में लेवी वसूली का जरिया थे. मांग पूरी न होने पर ही पाइपलाइन तोड़ने और हिंसा जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता था.
कुंजाम ने सरकार को आगाह किया कि आत्मसमर्पण कर गांव लौटने वाले नक्सलियों और पीड़ित ग्रामीणों के बीच सामाजिक टकराव की स्थिति बन सकती है, जिसे रोकना अनिवार्य है. उन्होंने नक्सल हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अब शिक्षा और विकास के कारण युवा पीढ़ी इस खोखली विचारधारा से दूर हो रही है.