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सुकमा में कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान

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28 जून 2026, 04:01 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

कुपोषण
कुपोषण

सुकमा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुदूर और पहुंच विहीन क्षेत्रों में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत अपने प्रयासों को तेज कर दिया है. सुकमा जिले के अत्यंत सुदूर गांव गुमड़ी सहित अन्य नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार और उनके पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं.


सुकमा के जिला कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मैदान में तैनात टीमों के जरिए आंगनबाड़ियों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच करना और कुपोषण के कारणों की पहचान करना है. जांच के दौरान गंभीर रूप से कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को विशेष देखभाल के लिए जिले के तीन पोषण पुनर्वास केंद्रों में भेजा जा रहा है.

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प्रशासन अब इस मुहिम को एक कदम और आगे ले जाने की योजना बना रहा है. इसके तहत आंगनबाड़ियों को प्राथमिक स्कूलों से जोड़ा जाएगा, जहां प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक सप्ताह में एक घंटा बच्चों के पोषण स्तर और उनकी शिक्षा में सुधार के लिए समर्पित करेंगे.


मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को 15 दिनों के लिए भर्ती किया जाता है. यहाँ स्वच्छता और एक विशेष डाइट चार्ट के माध्यम से बच्चों का वजन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है. इसके साथ ही माताओं को भी प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे घर पर भी बच्चों की उचित देखभाल जारी रख सकें.


इन स्वास्थ्य प्रयासों का बड़ा असर जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी के रूप में भी देखने को मिला है. स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदूर इलाकों तक पहुंचाते हुए कोंटा में एक अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की गई है, जहां हर महीने की 9 और 24 तारीख को विशेष स्क्रीनिंग कैंप आयोजित किए जाते हैं. 


डॉ. सिंह के अनुसार, बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के चलते पिछले वर्ष पूरे जिले में केवल आठ मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, और प्रशासन अब इस आंकड़े को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. File Photo.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP