महाराष्ट्र: 82 लाख के इनामी 11 माओवादियों ने किया सरेंडर
गड़चिरोली । डेस्क: महाराष्ट्र ने मार्च 2026 तक माओवादी खतरे को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राज्य के गड़चिरोली जिले में 82 लाख रुपये के संयुक्त इनाम वाले चार कमांडरों सहित 11 वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने राज्य पुलिस प्रमुख रश्मि शुक्ला के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.
आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमिटी के सदस्य रमेश उर्फ बाजी लेकामी और भीमा उर्फ किरण हिडमा कोवासी शामिल हैं. लेकामी 2004 से इस आंदोलन से जुड़ा था और बाद में भामरागढ़ में डिविजनल कमिटी का सदस्य बन गया. वहीं, कोवासी 1998 में माओवादी रैंक में शामिल हुआ और 2019 में डिविजनल कमिटी का सदस्य बना.
गड़चिरोली पुलिस के अनुसार, इन आत्मसमर्पणों को छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना तक फैले दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. अक्टूबर में माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति उर्फ माल्लोजुला वेणुगोपाल राव और 60 अन्य के आत्मसमर्पण के बाद यह सबसे बड़ी सफलता है. उस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान उन्हें हथियार की जगह भारतीय संविधान की प्रति सौंपी थी.
पुलिस प्रमुख शुक्ला ने इस ताजा आत्मसमर्पण को “गड़चिरोली में माओवाद के अंत की शुरुआत” बताया और वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की 31 मार्च, 2026 की समय सीमा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने बताया कि इस वर्ष अकेले गड़चिरोली में 112 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है.
एकलव्य हॉल में हुए आत्मसमर्पण समारोह में, लाहेरी जंगल में ऑपरेशन के लिए विशिष्ट सी-60 नक्सल विरोधी इकाई के अधिकारियों और कर्मियों को भी सम्मानित किया गया.
अन्य आत्मसमर्पण करने वालों में पोरिये उर्फ लकी आदम गोटा, रतन उर्फ सन्ना मासु ओयाम, कमला उर्फ रागो इरिया वेलादी, पोरिये उर्फ कुमारी भीमा वेलादी, रामजी उर्फ मुर लच्छु पुंगाती, सोनू पोडियम उर्फ अजय सानू काटो, प्रकाश उर्फ पांडु कुंद्रा पुंगाती, सीता उर्फ जैनी टोंडे पालो और साईनाथ शंकर माडे शामिल हैं.
यह आत्मसमर्पण भारत भर में तेज किए गए माओवादी विरोधी अभियानों के बाद हुआ है. पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 270 से अधिक माओवादियों को मार गिराया है. अब तक 1,225 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, और शीर्ष नेताओं सहित 680 को गिरफ्तार किया गया है. 20 मई को माओवादी प्रमुख नंबला केशव राव उर्फ बासवराज के मारे जाने को उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है.
केंद्र सरकार के अनुसार, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल में 18 से घटकर 11 हो गई है, जो इस आंदोलन पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है.