इंदौर में दूषित पानी से हाहाकार: 10 मौतें, 2,000 से ज्यादा बीमार
इंदौर । डेस्क: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में नगर निगम की जलापूर्ति से फैले दूषित पानी के संकट ने गंभीर रूप ले लिया है. इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,000 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं. मृतकों में एक छह माह का बच्चा और छह महिलाएं शामिल हैं.
बीते एक सप्ताह में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से 100 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई की गई है. इंदौर नगर निगम के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रभारी उप-यंत्री शुभम श्रीवास्तव को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित किया गया है.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक करीब 7,992 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 39,854 लोगों की जांच हुई. इनमें से 2,456 संदिग्ध मरीज पाए गए, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया.
कुल 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 50 को छुट्टी मिल चुकी है. फिलहाल 162 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 26 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं.
घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है. समिति की अध्यक्षता आईएएस अधिकारी नवजीवन पंवार कर रहे हैं. इसमें अधीक्षण यंत्री प्रदीप निगम और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर शैलेश राय सदस्य हैं. यह समिति भागीरथपुरा इलाके में नई जलापूर्ति लाइन के लिए अगस्त में जारी टेंडर में हुई देरी की भी जांच करेगी.
इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने बताया कि इलाके में शौचालय की नाली से मुख्य जलापूर्ति लाइन में रिसाव पाया गया था, जिसे ठीक कर दिया गया है और संबंधित शौचालय को हटाया गया है. अन्य जगहों पर भी लीकेज सुधारने का काम किया गया है. पानी की जांच के बाद ही सप्लाई दोबारा शुरू की जाएगी. फिलहाल लोगों की जरूरत के लिए 100 से अधिक पानी के टैंकर भेजे गए हैं.
इस बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और 2 जनवरी तक स्थिति रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि आरोप है कि कुछ निजी अस्पताल बिना पैसे इलाज से इनकार कर रहे हैं.
वहीं, राज्य कांग्रेस ने भी इस घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति बनाई है, जो 5 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी.