लोकसभा में शशि थरूर ने परिसीमन को 'राजनीतिक नोटबंदी' बताया
नई दिल्ली । डेस्क: लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. थरूर ने इस कदम की तुलना 'नोटबंदी' से करते हुए इसे 'राजनीतिक नोटबंदी' करार दिया.
उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में लिया गया यह फैसला देश में 'जनसांख्यिकीय बहुमत की तानाशाही' पैदा कर सकता है, जिससे बड़े और गरीब राज्य देश की किस्मत तय करने लगेंगे.
थरूर ने सदन में तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है और राष्ट्रीय खजाने में बड़ा योगदान देते हैं, उन्हें उनके बेहतर शासन के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भविष्य में जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक वजन देकर पुरस्कृत किया जाएगा?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि परिसीमन केवल नक्शों का पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक शक्तियों का एक बड़ा बदलाव है जो भारत के संघीय ढांचे को खतरे में डाल सकता है.
महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर थरूर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'नारी शक्ति' का यह उपहार कांटेदार तारों में लिपटा हुआ है. उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध करते हुए इसे तुरंत लागू करने की मांग की.
थरूर ने सुझाव दिया कि सरकार इन दोनों मुद्दों को अलग करे, महिला आरक्षण को अगले आम चुनाव से प्रभावी बनाए और परिसीमन के जटिल मुद्दे पर चर्चा के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन करे. अमेरिका के 1787 के 'कनेक्टिकट समझौते' का उदाहरण देते हुए उन्होंने एक ऐसे ऐतिहासिक समाधान की अपील की जिससे किसी भी क्षेत्र को छोटा महसूस न हो.