अडानी ग्रुप में LIC का 48,284 करोड़ निवेश: संसद में खुलासा
नई दिल्ली । डेस्क: नरेंद्र मोदी सरकार पर अडानी ग्रुप को वित्तीय सहायता देने के आरोपों के बीच संसद में बड़ा खुलासा हुआ है. केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि राष्ट्रीयकृत लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) ने अब तक अडानी ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में कुल 48,284.62 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसमें से 38,658.85 करोड़ रुपये शेयर बाजार (इक्विटी) में और 9,625.77 करोड़ रुपये ऋण के रूप में दिए गए हैं. इसके अलावा, LIC ने हाल ही में अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के सुरक्षित NCD में अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं.
यह जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक लिखित प्रश्न के जवाब में दी. हालांकि, सरकार ने LIC के निजी कंपनियों में निवेश की पूरी सूची देने से इनकार कर दिया. केंद्र का तर्क है कि यह जानकारी "व्यावसायिक रूप से उचित नहीं" है और इससे LIC के वित्तीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है.
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने LIC के इस निवेश पर नियंत्रण, पारदर्शिता, जोखिम मूल्यांकन और संभावित सरकारी हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए थे. उनका दावा है कि जांच और बाजार अस्थिरता के बीच फंसे अडानी ग्रुप में LIC का इतना बड़ा निवेश पॉलिसीधारकों के पैसे को जोखिम में डाल रहा है. विपक्षी दलों का कहना है कि यह निवेश जनता के बचत को खतरे में डाल सकता है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि LIC के निवेश निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र हैं और वित्त मंत्रालय या डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) से कोई निर्देश या सलाह नहीं दी गई. केंद्र के अनुसार, LIC अपने निवेश इंश्योरेंस एक्ट 1938 और IRDAI, RBI तथा SEBI के नियमों के अनुरूप करता है. सभी निवेश नियमित ऑडिट, निगरानी और निरीक्षण के दायरे में होते हैं, लेकिन सरकार का कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण या निर्देश नहीं है.
गौरतलब है कि मात्र दो महीने पहले वाशिंगटन पोस्ट की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वित्त मंत्रालय, DFS, नीति आयोग और LIC ने मिलकर अडानी ग्रुप के लिए एक वित्तीय "गुप्त योजना" तैयार की थी, जिसके तहत LIC ने अकेले अडानी पोर्ट्स के 585 मिलियन डॉलर के बॉन्ड इश्यू को फंड किया.
संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, LIC वर्तमान में अडानी की सात कंपनियों-अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी टोटल गैस, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी पोर्ट्स एंड SEZ, अंबुजा सीमेंट्स और ACC-में निवेश बनाए हुए है. सरकार ने बताया कि LIC मुख्य रूप से NSE और BSE की टॉप 500 कंपनियों में निवेश करता है. निफ्टी-50 कंपनियों में LIC का कुल निवेश 4,30,776.97 करोड़ रुपये है, जो उसके पूर्ण इक्विटी निवेश का लगभग 46 प्रतिशत है.
विपक्ष अब सवाल उठा रहा है कि अगर निवेश पूरी तरह स्वतंत्र हैं, तो निवेश की पूरी सूची क्यों नहीं जारी की जा रही? जांच के घेरे में एक विवादास्पद कॉर्पोरेट समूह में सार्वजनिक बीमा संस्था का इतना विशाल निवेश क्या जनता के धन को असुरक्षित तो नहीं बना रहा?