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LIC फंड का अडानी ग्रुप के लिए दुरुपयोग किया गया: कांग्रेस

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25 अक्टू. 2025, 08:25 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

जयराम रमेश
जयराम रमेश

नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के ३० करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का पैसा "व्यवस्थित तरीक़े से दुरुपयोग" करने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसका सीधा फ़ायदा कथित तौर पर अडानी समूह को मिला है. शनिवार (२५ अक्टूबर, २०२५) को जारी एक बयान में कांग्रेस ने यह आरोप लगाते हुए माँग की है कि संसद की लोक लेखा समिति (PAC) इस बात की जाँच करे कि LIC को अडानी समूह की कंपनियों में निवेश करने के लिए किस तरह "बाध्य" किया गया. इस आरोप पर फ़िलहाल अडानी समूह या सरकार की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है.


कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया में आई "परेशान करने वाली जानकारियों" का हवाला देते हुए कहा कि "मोदानी गठजोड़ ने LIC और उसके ३० करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का किस तरह व्यवस्थित तरीक़े से दुरुपयोग किया है."


अंदरूनी दस्तावेज़ों से बड़े ख़ुलासे

रमेश ने दावा किया कि आंतरिक दस्तावेज़ों से यह पता चलता है कि मई २०२५ में भारतीय अधिकारियों ने LIC के लगभग ₹३३,००० करोड़ के फंड को अडानी समूह की विभिन्न कंपनियों में निवेश करने का प्रस्ताव तैयार किया और उसे आगे बढ़ाया.


उन्होंने कहा कि इन निवेशों का कथित लक्ष्य "अडानी समूह में विश्वास का संकेत देना" और "अन्य निवेशकों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना" था. रमेश ने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा, "वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के अधिकारियों ने किसके दबाव में यह फ़ैसला लिया कि उनका काम आपराधिकता के गंभीर आरोपों के कारण धन जुटाने में मुश्किलों का सामना कर रही एक निजी कंपनी को संकट से बाहर निकालना है? क्या यह 'मोबाइल फ़ोन बैंकिंग' का स्पष्ट उदाहरण नहीं है?"



LIC को ₹७,८५० करोड़ का "आश्चर्यजनक" नुक़सान

कांग्रेस नेता ने बताया कि "करीबी कंपनियों पर जनता का पैसा फेंकने" की क़ीमत तब साफ़ हुई जब २१ सितंबर, २०२४ को गौतम अडानी और उनके सात सहयोगियों पर अमेरिका में मुक़दमा दायर होने के महज़ चार घंटों के भीतर LIC को ₹७,८५० करोड़ का भारी नुक़सान झेलना पड़ा.


रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि अडानी पर भारत में ऊँचे दाम पर सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए ₹२,००० करोड़ की रिश्वत योजना चलाने का आरोप है और मोदी सरकार ने लगभग एक साल से प्रधानमंत्री के "सबसे चहेते व्यापार समूह" को अमेरिकी SEC (Securities and Exchange Commission) का समन तामील करने से इनकार कर दिया है.



"मोदानी महाघोटाला" और JPC की माँग

कांग्रेस, अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फ़र्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद से ही अडानी समूह के शेयरों में आई गिरावट को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रही है. हालाँकि, अडानी समूह ने कांग्रेस और अन्य द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को झूठ बताते हुए ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि वे सभी क़ानूनों और प्रकटीकरण आवश्यकताओं का पालन करते हैं.


जयराम रमेश ने दावा किया कि "मोदानी महाघोटाला" बहुत व्यापक है, जिसमें कथित तौर पर ED, CBI और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर अन्य निजी कंपनियों को अपनी संपत्तियाँ अडानी समूह को बेचने के लिए मजबूर करना शामिल है. उन्होंने हवाई अड्डों और बंदरगाहों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की संपत्तियों का "धाँधली भरा निजीकरण" करने और यहाँ तक कि विदेशों, विशेषकर भारत के पड़ोस में, अडानी समूह को ठेके दिलाने के लिए राजनयिक संसाधनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया.


रमेश ने यह भी कहा कि इस कथित घोटाले में अडानी के करीबी सहयोगी नासेर अली शाबान अली और चांग चुंग-लिंग द्वारा शैल कंपनियों के मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का उपयोग करके "ओवर-इनवॉइस" कोयले का आयात करना भी शामिल है, जिससे गुजरात में अडानी पावर स्टेशनों से बिजली की क़ीमतों में तेज़ी से वृद्धि हुई.


अंत में, उन्होंने कहा कि इस "मोदानी महाघोटाले" की पूरी तरह से जाँच केवल एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ही कर सकती है, जिसकी माँग भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगभग तीन वर्षों से कर रही है. हालाँकि, पहले क़दम के तौर पर, उन्होंने तत्काल लोक लेखा समिति (PAC) से जाँच की माँग करते हुए कहा कि LIC को अडानी समूह में निवेश करने के लिए कैसे "शाब्दिक रूप से बाध्य" किया गया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP