रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

कॉरपोरेट-परस्त नीतियों के खिलाफ इतिहास की सबसे बड़ी लामबंदी

C

CG Khabar

12 फ़र. 2026, 07:10 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

12 फरवरी आम हड़ताल
12 फरवरी आम हड़ताल

नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को आयोजित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल ने देश के औद्योगिक और कृषि परिदृश्य को हिलाकर रख दिया है. ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन में देशभर के लगभग 30 करोड़ श्रमिकों, किसानों और खेतिहर मजदूरों ने हिस्सा लिया. 


यह हड़ताल मुख्य रूप से केंद्र सरकार की चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) और अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) व ब्रिटेन के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के विरोध में बुलाई गई थी.

विज्ञापन


देश के 600 से अधिक जिलों में इस हड़ताल का जबरदस्त असर देखा गया. खनन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के साथ-साथ रक्षा और रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कर्मचारियों ने भी एकजुटता दिखाते हुए प्रदर्शन किए. 


यूनियनों ने अपनी मांगों के चार्टर में ड्राफ्ट बीज विधेयक, बिजली (संशोधन) विधेयक, 'शांति' (SHANTI) अधिनियम, विकसित भारत-ग्राम योजना और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को वापस लेने की मांग की है. 


इसके अतिरिक्त, किसान संगठनों ने स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के आधार पर सभी फसलों के लिए एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी की मांग को भी प्रमुखता से उठाया.


संयुक्त किसान मोर्चा ने इस हड़ताल को स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी लामबंदी करार देते हुए कहा कि इसने कॉरपोरेट-परस्त नीतियों के खिलाफ 'मजदूर-किसान एकता' को एक नई दिशा दी है. 


ट्रेड यूनियन नेताओं के अनुसार, यह हड़ताल न केवल आर्थिक नीतियों के खिलाफ एक आक्रोश है, बल्कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने की कोशिशों के खिलाफ एक करारा जवाब भी है. आगामी 24 फरवरी को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में होने वाली बैठक में किसान और मजदूर संगठन आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तय करेंगे.


देशव्यापी आम हड़ताल का असर भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रहा, जहाँ केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में जनजीवन पूरी तरह ठहर गया, वहीं अन्य औद्योगिक केंद्रों में भी कामकाज पर गहरा प्रभाव पड़ा. केरल में हड़ताल का सबसे व्यापक असर देखा गया, जहाँ राज्य परिवहन की बसें (KSRTC), निजी बसें और ऑटो-रिक्शा पूरी तरह सड़कों से नदारद रहे, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. 


ओडिशा में भी भुवनेश्वर और कटक जैसे प्रमुख शहरों में सड़कों पर जाम लगाकर यातायात ठप कर दिया गया और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे. पंजाब में सत्ताधारी दल के समर्थन और किसान यूनियनों की सक्रियता के चलते ग्रामीण क्षेत्रों और परिवहन सेवाओं में जबरदस्त भागीदारी देखी गई.


दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु के तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर कामकाज काफी हद तक प्रभावित रहा और श्रीपेरंबुदूर जैसे औद्योगिक हब में भारी विरोध प्रदर्शन हुए. तेलंगाना के संगारेड्डी और मेडचल औद्योगिक क्षेत्रों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे. 


झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में कोयला खनन और पीएसयू (PSU) गेट पर प्रदर्शनों के कारण परिचालन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ, हालांकि भिलाई जैसे कुछ केंद्रों में काम सामान्य रहा. 


इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में हड़ताल का मिला-जुला या सीमित असर देखने को मिला, जहाँ अधिकांश निजी और सरकारी कार्यालय खुले रहे और परिवहन सेवाएँ सामान्य रूप से चलती रहीं. मध्य प्रदेश में रक्षा संस्थानों के हजारों कर्मचारियों ने काम में देरी कर विरोध जताया, जबकि दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में जुलूस निकाले गए और जंतर-मंतर पर बड़ी सभा आयोजित की गई.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP