कपिल सिब्बल ने रुपये की गिरावट और 'अमीरों के बजट' पर उठाए सवाल
नई दिल्ली । डेस्क: पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भारतीय रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है. केंद्रीय बजट से ठीक पहले पीटीआई (PTI) को दिए एक साक्षात्कार में सिब्बल ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे 'आर्थिक वास्तविकता के बजाय राजनीतिक मजबूरी' करार दिया.
उन्होंने याद दिलाया कि संप्रग (UPA) शासन के दौरान जब रुपया गिर रहा था, तब मोदी इसे 'राजनीतिक खेल' के तौर पर इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब जब रुपया उनके कार्यकाल में 63 से गिरकर 92 पर पहुंच गया है, तो वे पूरी तरह मौन हैं.
सिब्बल ने बजट की अवधारणा को 'उपयोगितावादी' बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य गरीबों के दर्द को कम करना और खुशियां बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन पिछले 11 वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें मौजूदा सरकार से ऐसी कोई उम्मीद नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास संसाधनों की कमी है क्योंकि वह पिछले दशक में अधिशेष पैदा करने में विफल रही है. सिब्बल के अनुसार, भारत एक आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था है, जहां रुपये की कमजोरी के कारण कच्चा तेल, खाद, चिकित्सा उपकरण और टेलीकॉम हार्डवेयर जैसी जरूरी चीजें महंगी हो रही हैं, जिसका सीधा बोझ आम आदमी और गरीबों की जेब पर पड़ रहा है.
देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए स्वतंत्र सांसद ने कहा कि केवल विकास दर के आंकड़े हकीकत नहीं दर्शाते. उन्होंने तर्क दिया कि भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 2,800 डॉलर है, जो ब्राजील, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से काफी कम है.
उन्होंने कहा कि असली चुनौती यह है कि देश की 80 प्रतिशत आबादी 5,000 से 10,000 रुपये प्रति माह पर गुजारा कर रही है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 'विकसित भारत' के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने कहा कि बिना सांप्रदायिक सद्भाव और विपक्ष को विश्वास में लिए देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना संभव नहीं है.