जशपुर: स्कूलों में प्रार्थना के विरोध में सर्व आदिवासी समाज
जशपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में प्रार्थना सभा को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों पर जशपुर जिले में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. सर्व आदिवासी समाज ने शैक्षणिक संस्थानों में सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र जैसे धार्मिक पाठ को अनिवार्य बनाने के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है.
इस सिलसिले में समाज के पदाधिकारियों ने राज्यपाल को संबोधित एक पांच सूत्रीय मांग पत्र जिला कलेक्टर को सौंपकर नियमों को वापस लेने की मांग की है.
आदिवासी संगठन का तर्क है कि छत्तीसगढ़ एक बहुसांस्कृतिक, बहुभाषी और बहुधार्मिक प्रदेश है, जहां जनजातीय समुदायों की अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक मान्यताएं और जीवन दर्शन हैं.
ऐसे में सरकारी विद्यालयों के भीतर किसी एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों अथवा प्रार्थनाओं को थोपना भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्ष मूल भावना और सांस्कृतिक विविधता के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है.
संगठन ने संवैधानिक अनुच्छेदों का हवाला देते हुए मांग की है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में किसी भी धर्म या संप्रदाय विशेष के अनुष्ठानों को अनिवार्य न किया जाए.
गौरतलब है कि शासन ने बीते 12 जून को एक नया आदेश लागू किया था, जिसके तहत राज्य के सभी शासकीय स्कूलों में तीन अलग-अलग समय पर प्रार्थना करना अनिवार्य कर दिया गया है. नई व्यवस्था के अनुसार, सुबह की पाली की शुरुआत में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु वंदना होगी, जबकि दोपहर के समय भोजन मंत्र और स्कूल की छुट्टी के वक्त राज्यगीत, गायत्री मंत्र व शांति मंत्र का पाठ करना होगा.
इस नए सरकारी आदेश के खिलाफ जिला मुख्यालय में मोर्चा खोलने वालों में विनोद प्रधान, विभूति कुमार भगत, विष्णु मरावी, आश्रित खेस्स, अरुण खलखो, राजेश भगत और संदीप कुजूर सहित आदिवासी समाज के कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे. File Photo.