जयशंकर ने ट्रम्प के सीजफायर दावे को खारिज किया
नई दिल्ली । डेस्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान सरकार का मजबूती से बचाव किया. उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी, की निंदा करने में चीन, ईरान और रूस सहित कई देशों ने भारत का समर्थन किया.
यह बयान विपक्षी सांसद अरविंद गणपत सावंत के उस दावे के जवाब में था कि इस संकट के दौरान कोई भी देश भारत के साथ नहीं खड़ा था.
जयशंकर ने बताया कि पहलगाम हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम उठाये, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना, इस्लामाबाद उच्चायोग के राजनयिकों को अवांछित घोषित करना और अटारी सीमा को बंद करना शामिल है.
उन्होंने कहा कि भारत का कूटनीतिक उद्देश्य पहलगाम हमले को वैश्विक स्तर पर समझाना और समर्थन जुटाना था.
उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर भारत पर हमला होता है और कोई देश सीमा पार आतंकवाद की निंदा करता है, तो इसका मतलब स्पष्ट है."
विपक्ष द्वारा उठाए गये एक प्रमुख सवाल अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीजफायर दावे पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि 9 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमरीकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था, जिसमें पीएम ने साफ किया कि हमले की स्थिति में भारत जवाब देगा.
उन्होंने कहा, "भारत ने उस बड़े हमले को नाकाम कर दिया. हमारा जवाब दिया गया." साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दौरान पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई.
हालांकि, जयशंकर ने 10 मई को ट्रम्प द्वारा अचानक किए गए सीजफायर ऐलान के हालात पर विस्तार से कुछ नहीं कहा. ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उनकी मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान ने सीजफायर पर सहमति जताई है. कुछ घंटों बाद दोनों देशों ने इसकी पुष्टि की.
जहां पाकिस्तान ने ट्रम्प को शांति स्थापना के लिये धन्यवाद दिया, वहीं भारत ने उनकी भूमिका को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया और कहा कि यह समझौता भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के डीजीएमओ के बीच सीधे बातचीत से हुआ.
बाद में, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुये कहा, "मुझे आपत्ति है कि विपक्ष को अपने विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं, लेकिन किसी अन्य देश पर भरोसा है."
कांग्रेस पर तंज कसते हुये उन्होंने कहा, "मैं उनकी पार्टी में 'विदेश' की अहमियत समझता हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी पार्टी की हर बात को सदन में थोपा जाए. यही कारण है कि वे वहां (विपक्षी बेंच) बैठे हैं और अगले 20 साल तक वहीं बैठे रहेंगे."