इजराइल-ईरान तनाव में भारत में बढ़ेगी महंगाई
नई दिल्ली । डेस्क: इजराइल और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए युद्ध ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है. जिसका असर भारतीय और अमरीकी बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है. 12 जून को इजराइल द्वारा ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर किये गये हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया गया.
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 10% बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 10% चढ़कर 74 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. जे.पी. मॉर्गन की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह तनाव बना रहा तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है.
यदि यह कीमतें 80-90 डॉलर प्रति बैरल तक जाती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 2-5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत 85% तेल आयात करता है. हालांकि, सरकार के भंडार और वैकल्पिक आयात स्रोत इस वृद्धि को सीमित कर सकते हैं.
ईरान, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तरी किनारे पर स्थित है, जहां से सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे देशों का तेल सप्लाई होता है. यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है. अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इस मार्ग को ब्लॉक किया, तो रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुक सकती है, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार भी जा सकती हैं. ईरान ने इजराइल के हमलों के जवाब में 100 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म MST मार्की के सीनियर एनर्जी एनालिस्ट सॉल कावोनिक के अनुसार, अभी तेल की कीमतों में उछाल डर के कारण है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ब्लॉक होने पर आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है. अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो तेल उत्पादक देश सप्लाई में कटौती कर सकते हैं, जिससे कीमतें और बढ़ेंगी.
भारत, जो अपनी 85% से ज्यादा तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, के लिये यह स्थिति गंभीर चुनौती पेश करती है. तेल की कीमतों में यह उछाल भारत के आयात बिल को बढ़ायेगा, जिससे ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा है. इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ेगा, जो पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कमजोर है. पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई भड़क सकती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. साथ ही, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स की लागत बढ़ने से औद्योगिक उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है.
अगर दोनों देश बातचीत की मेज पर आये, तो स्थिति शांत हो सकती है. लेकिन लंबे समय तक तनाव बने रहने पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है. जे.पी. मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकती है, जिससे सरकार के लिये ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना एक बड़ा चैलेंज होगा.