स्पेन और ब्राजील के नागरिकों को इजरायल ने किया गिरफ्तार, प्रताड़ना के आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: इजरायली बलों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मानवीय सहायता बेड़े 'ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला' पर की गई कार्रवाई ने अब एक बड़े राजनयिक विवाद का रूप ले लिया है. इस अभियान के दौरान हिरासत में लिए गए 175 कार्यकर्ताओं में से केवल दो स्पेन के सैफ अबू केषेक और ब्राजील के थियागो आविला को इजरायल ने अपनी कैद में रखा है. रविवार को एशकेलोन की एक अदालत ने इन दोनों की हिरासत को दो दिनों के लिए और बढ़ा दिया. यह मामला इसलिए अधिक संवेदनशील हो गया है क्योंकि दोनों ही कार्यकर्ता जेल में भूख हड़ताल पर हैं और उनके देशों की सरकारों ने इजरायल के इस कदम की कड़ी आलोचना की है.
स्पेनिश कार्यकर्ता सैफ अबू केषेक की हिरासत और प्रताड़ना के दावे
सैफ अबू केषेक एक स्पेनिश-स्वीडिश नागरिक हैं और पिछले दो दशकों से यूरोप में फिलिस्तीनी अधिकारों के लिए सक्रिय रहे हैं. उन्हें ग्रीस के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से हिरासत में लेकर इजरायल की शिकमा जेल में स्थानांतरित किया गया है. मानवाधिकार संगठन 'अदलाह' ने केषेक से मुलाकात के बाद बताया कि उन्हें जहाज पर कब्जे के समय से ही आंखों पर पट्टी बांधकर और हाथ बांधकर रखा गया था. उन्हें सैन्य जहाज के फर्श पर घंटों औंधे मुंह लेटने के लिए मजबूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनके चेहरे और शरीर पर चोट के निशान उभरे हैं. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने सार्वजनिक रूप से इस गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए अपने नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की मांग की है.
ब्राजीलियाई पर्यावरणविद् थियागो आविला के साथ अमानवीय व्यवहार
ब्राजील के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता थियागो आविला को लेकर भी स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है. 38 वर्षीय आविला 'फ्रीडम फ्लोटिला' के समन्वयकों में से एक हैं और पहले भी इजरायली हिरासत का सामना कर चुके हैं. ब्राजीलियाई दूतावास के अधिकारियों ने जब उनसे जेल में मुलाकात की, तो उन्होंने आविला के चेहरे पर स्पष्ट चोटें देखीं. आविला ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान इजरायली सैनिकों ने उन्हें इतनी बेरहमी से घसीटा और पीटा कि वह दो बार बेहोश हो गए थे. वर्तमान में वह कंधे के गंभीर दर्द से जूझ रहे हैं और बिना भोजन के केवल पानी पीकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्रवाई और समुद्री डकैती के आरोप
ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला का उद्देश्य गाजा की लंबे समय से जारी समुद्री नाकेबंदी को तोड़ना और वहां रह रहे 23 लाख लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना था. तुर्की सहित कई देशों ने इजरायल की इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन और "समुद्री डकैती" करार दिया है. फ्लोटिला के आयोजकों का तर्क है कि यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से नागरिकों को जबरन उठाना और उन्हें दूसरे देश की जेल में बंद करना अंतरराष्ट्रीय संधियों का खुला उल्लंघन है. संगठन ने दुनिया भर के नागरिक समाजों और कानूनी संस्थाओं से अपील की है कि वे इन कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई के लिए इजरायल पर दबाव बनाएं, क्योंकि यह मामला केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि मानवीय सहायता के वैश्विक अधिकारों का है.