डोनाल्ड ट्रंप की नरमी क्या उनकी मजबूरी है?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, "मैं हमेशा (पीएम) मोदी के साथ दोस्ती निभाऊंगा. वह एक महान प्रधानमंत्री हैं. लेकिन मुझे इस समय उनकी कुछ नीतियां पसंद नहीं हैं. फिर भी, भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही विशेष संबंध हैं." जाहिर है हालिया SCO सम्मेलन में भारत की चीन से निकटता तथा भारत-रूस-चीन की जुगलबंदी अमेरिका की नीतियों को कमजोर करता है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उनके ही देश में इस बात के लिये आलोचना हो रही है कि वे, भारत जैसे दोस्त को खोने जा रहे हैं.
ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने "भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है." उन्होंने भारत के रूस से तेल खरीद पर चिंता जताते हुए कहा, "मुझे निराशा हुई कि भारत रूस से इतना तेल खरीद रहा है. हमने भारत पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया है."
इसके जवाब में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्रम्प के बयानों पर प्रतिक्रिया दी और उनके सकारात्मक विचारों की सराहना की.
अपने एक्स पोस्ट में मोदी ने लिखा, "राष्ट्रपति ट्रम्प के हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन और भावनाओं की मैं गहराई से सराहना करता हूँ और पूरी तरह से इसका पारस्परिक जवाब देता हूँ. भारत और अमेरिका के बीच व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी बहुत सकारात्मक और भविष्योन्मुखी है."
https://twitter.com/narendramodi/status/1964180697012228163
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद के कारण संबंधों में तनाव देखा जा रहा है. ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ और रूस से तेल खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत का दंडात्मक टैरिफ लगाया है. भारत ने इन टैरिफ को "अनुचित और अव्यवहारिक" करार दिया है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा, "पीएम मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं. ट्रम्प के साथ उनकी हमेशा से बहुत अच्छी व्यक्तिगत समीकरण रही है. हम अमेरिका के साथ निरंतर संपर्क में हैं."
ट्रम्प की यह नरमी क्या उनकी मजबूरी का संकेत है, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन रहा है, खासकर तब जब भारत ने हाल ही में एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा किया और रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बनाए रखा है.