क्या ईरान के अशांति में विदेशी हाथ है?
तेहरान । डेस्क: ईरान में जारी आर्थिक संकट और उससे उपजी व्यापक अशांति के बीच राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने संकेत दिया है कि मौजूदा प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है. तेहरान में एक कारोबारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश इस समय बाहरी दबावों से जूझ रहा है और “दुर्भाग्य से, देश के भीतर भी कुछ ऐसे रुख और कदम उठाए जा रहे हैं, जो एकजुटता को कमजोर कर रहे हैं.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा संकट से उबरने के लिए राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है.
ईरान में यह अशांति बीते चार दिनों से लगातार जारी है. इसकी शुरुआत तेहरान में दुकानदारों के प्रदर्शन से हुई, जब ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई. हालात बिगड़ने के साथ ये प्रदर्शन अन्य शहरों तक फैल गए.
दक्षिणी प्रांत फ़ार्स के फ़ासा शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक स्थानीय सरकारी इमारत में घुसने की कोशिश की, जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया. सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस घटना में सुरक्षा बलों के तीन सदस्य घायल हुए, जबकि चार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.
ईरानी सरकार का कहना है कि ये प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक परेशानियों से जुड़े हैं. महंगाई दर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और रियाल की गिरती कीमत ने आयातित वस्तुओं को बेहद महंगा बना दिया है.
मौजूदा समय में एक अमेरिकी डॉलर के बदले लगभग 14.2 लाख रियाल चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि एक साल पहले यह दर करीब 8.2 लाख थी. दशकों से चले आ रहे पश्चिमी प्रतिबंधों और हाल में संयुक्त राष्ट्र द्वारा दोबारा लगाए गए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ा दिया है.
सरकार ने एक ओर जहां संवाद का रास्ता अपनाने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर सख्त चेतावनी भी दी है. ईरान के अभियोजक जनरल मोहम्मद मोवाहेदी-अज़ाद ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन वैध हैं, लेकिन अगर आर्थिक विरोध को अस्थिरता, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का जरिया बनाया गया, तो “कानूनी, निर्णायक और कड़ा जवाब” दिया जाएगा.
सरकारी प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने भी कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनने को तैयार है. उनके मुताबिक, “सरकार का काम लोगों की आवाज़ सुनना और समाज में मौजूद समस्याओं का समाधान निकालना है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार सरकार मान्यता देती है.
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ईरानी जनता का सरकार पर भरोसा लगातार कम हो रहा है. क्विंसी इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष त्रिता पारसी के अनुसार, खुद राष्ट्रपति द्वारा समस्याओं के समाधान में असमर्थता जताने से लोगों का विश्वास और कमजोर हुआ है.
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आर्थिक मुद्दों से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन आगे चलकर व्यापक राजनीतिक असंतोष का रूप ले सकते हैं.
कुल मिलाकर, सवाल यह है कि क्या ईरान में मौजूदा अशांति केवल घरेलू आर्थिक संकट का नतीजा है या इसके पीछे विदेशी ताकतें भी सक्रिय हैं जैसा कि राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने इशारा किया है. आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट संवाद से सुलझेगा या और गहराएगा.