क्या विश्व-व्यापार-संगठन का कोई औचित्य रह गया है?
बीजिंग । डेस्क: विश्व व्यापार संगठन (WTO) अपनी 30वीं वर्षगाँठ मना रहा है, ऐसे में वैश्विक व्यापार प्रणाली गहरे बदलाव के दौर से गुज़र रही है. एक ओर, कुछ देशों द्वारा शुरू किए गए व्यापार युद्धों और टैरिफ़ युद्धों ने विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से बाधित किया है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों को कमज़ोर किया है. दूसरी ओर, बढ़ती चुनौतियों का सामना करते हुए, देश सक्रिय रूप से बदलाव की तलाश कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों में वृद्धि हुई है.
अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को चिंता है कि भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण वैश्विक आर्थिक सहयोग का परिदृश्य एक "पहाड़ी इलाका" बन रहा है. कभी विश्व अर्थव्यवस्था का स्थिरता कारक रहा बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली आज अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है.
30 साल पहले, WTO की स्थापना ने दुनिया को यह आश्वासन दिया था कि व्यापार संघर्षों को नियमों के माध्यम से सुलझाया जा सकता है. आज, जब नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था अस्तित्वगत चुनौतियों का सामना कर रही है, तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के चुनाव ही आगे का रास्ता तय करेंगे.
सवाल यह है कि क्या दुनिया अलग-थलग करने वाली "दीवारें" खड़ी करेगी, या खुले "पुल" बनाएगी? आर्थिक वैश्वीकरण के सामने, कोई भी देश, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, मज़बूत हो या कमज़ोर, अगर वह प्रचलित वैश्विक रुझानों से मुँह मोड़ता है, तो अंततः पिछड़ जाएगा.
WTO महानिदेशक नगोज़ी ओकोंजो-इवेला के अनुसार, कड़ी चुनौतियों के बावजूद, वैश्विक व्यापार ने लचीलापन दिखाया है. विकासशील अर्थव्यवस्थाएं तेज़ी से वैश्विक व्यापार वृद्धि का मुख्य इंजन बन रही हैं.
संरचना के संदर्भ में, पारंपरिक व्यापार धीमा हो रहा है, जबकि डिजिटल व्यापार और हरित व्यापार रुझान के विपरीत बढ़ रहे हैं. देश अपनी व्यापार साझेदारी में विविधता ला रहे हैं ताकि एकल बाज़ारों पर निर्भरता कम हो सके.
संकटों और प्रतिक्रियाओं के इस ताना-बाना में, एक दिशा स्पष्ट होती जा रही है: दुनिया अलगाव और विखंडन की स्थिति में वापस नहीं जा सकती, और न ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को कृत्रिम रूप से विभाजित किया जा सकता है.
एक दृढ़ विश्वास यह है कि बहुपक्षवाद दुनिया के सामने आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों का समाधान करने का अनिवार्य रास्ता है, और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की मज़बूती से सुरक्षा करना स्थिर और निरंतर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग सुनिश्चित करने की कुंजी है.
चीन ने बहुपक्षवाद और संरक्षणवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया है और हाल ही में घोषणा की है कि वह WTO में वर्तमान और भविष्य की वार्ताओं में विशेष और विभेदक उपचार की मांग नहीं करेगा. यह वैश्विक व्यापार प्रणाली में चीन की भूमिका में एक महत्वपूर्ण बदलाव है और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की सुरक्षा के प्रति इसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, ताकि साझा विकास के लिए जगह का विस्तार किया जा सके और एक अधिक समृद्ध भविष्य बनाय(Symbolic Photo)ा जा सके.