क्या नेपाल बांग्लादेश की राह पर है?
काठमांडू । डेस्क: नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य हिस्सों में जेन जेड प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, जिससे देश में तनाव बढ़ता जा रहा है. कर्फ्यू के आदेशों को चुनौती देते हुए युवा प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और सोशल मीडिया बंद करने के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. इन प्रदर्शनों ने बांग्लादेश में हाल ही में हुए जन आंदोलनों की याद दिला दी है, जहां युवाओं ने सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. क्या नेपाल भी उसी रास्ते पर बढ़ रहा है?
काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन, कर्फ्यू की अनदेखी
सोमवार को जेन जेड प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के बाद कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जिसमें काठमांडू में 17 और इटहरी में 2 लोग शामिल हैं. इसके अलावा, 400 से अधिक प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए. पुलिस की इस कार्रवाई ने देशभर में आक्रोश फैला दिया, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया. काठमांडू में रिंग रोड के अंदर सुबह 8:30 बजे से अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लागू है, जबकि ललितपुर में सुबह 9 बजे से आधी रात तक और भक्तपुर में भी इसी समय से प्रतिबंध लागू किए गए हैं.
इसके बावजूद, युवाओं ने न्यू बनेश्वर में संसद भवन के सामने और काठमांडू घाटी के अन्य हिस्सों जैसे कलंकी, चापागांव और बालकुमारी में प्रदर्शन जारी रखा. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "कल की घटना ने सरकार की विफलता को उजागर किया. मैं यहां युवाओं के साथ खड़ा होने आया हूं." प्रदर्शनकारियों ने कोई बैनर नहीं उठाया, लेकिन उनकी उपस्थिति सरकार के खिलाफ उनके गुस्से को स्पष्ट रूप से दर्शाती है.
प्रधानमंत्री के आवास और नेपाली कांग्रेस कार्यालय में आगजनी
प्रदर्शनों ने मंगलवार को और हिंसक रूप ले लिया, जब जेन जेड प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भक्तपुर के बालकोट स्थित निजी आवास पर आग लगा दी. पुलिस के रोकने के बावजूद प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरे को तोड़कर आवास परिसर में घुस गए और वहां मौजूद दोनों घरों को आग के हवाले कर दिया. इसके अलावा, सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस के सानेपा स्थित केंद्रीय कार्यालय को भी प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शनकारी अब राजनेताओं के घरों और प्रमुख दलों के कार्यालयों को निशाना बना रहे हैं, जिसमें पथराव और आगजनी की घटनाएं शामिल हैं.
सरकार की प्रतिक्रिया और सर्वदलीय बैठक
प्रधानमंत्री ओली ने बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मंगलवार शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, हालांकि स्थान का खुलासा नहीं किया गया है. एक बयान में उन्होंने कहा, "मैं सोमवार के प्रदर्शनों और उसके बाद की घटनाओं से दुखी हूं. हिंसा का कोई भी रूप राष्ट्र के हित में नहीं है. हमें शांतिपूर्ण और संवाद-आधारित समाधान की ओर बढ़ना चाहिए." ओली ने सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत शुरू करने की बात कही, ताकि स्थिति का आकलन कर कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सके.
हालांकि, विपक्षी और सत्तारूढ़ दलों के नेताओं ने सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की है. उनका कहना है कि सोमवार की त्रासदी सरकार की दमनकारी नीतियों का परिणाम है.
बांग्लादेश की राह पर नेपाल?
नेपाल में चल रहे ये प्रदर्शन बांग्लादेश में हाल के जन आंदोलनों की याद दिलाते हैं, जहां युवाओं ने भ्रष्टाचार और सरकारी दमन के खिलाफ एकजुट होकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. नेपाल में जेन जेड के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने भी भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाई है. काठमांडू घाटी और अन्य जिलों में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और प्रदर्शनकारी कर्फ्यू के बावजूद सड़कों पर डटे हुए हैं.
जैसा कि नेपाल में अशांति बढ़ रही है, सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन बांग्लादेश की तरह एक बड़े परिवर्तन का कारण बनेगा, या सरकार संवाद के जरिए स्थिति को नियंत्रित कर पाएगी. फिलहाल, देश एक अनिश्चित मोड़ पर खड़ा है.