क्या मादुरो की गिरफ्तारी चावेज की विचारधारा का अंत है?
नई दिल्ली । डेस्क: वेनेजुएला की राजनीति में 3 जनवरी की घटना केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उस 'चाविस्मो' विचारधारा के अस्तित्व पर सबसे बड़ा प्रहार है जिसने पिछले 27 वर्षों से लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती दी थी. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स की अमेरिकी कार्रवाई में गिरफ्तारी ने न केवल काराकास की सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या हूगो चावेज द्वारा बोया गया समाजवाद का बीज अब पूरी तरह सूख चुका है.
अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज द्वारा अमेरिका के साथ सहयोग करने और वाशिंगटन की शर्तों को मानने के फैसले ने चाविस्मो के सबसे बुनियादी स्तंभ, साम्राज्यवाद का विरोध को जमींदोज कर दिया है.
1999 में जब हूगो चावेज सत्ता में आए थे, तो उन्होंने 'बोलिवेरियन क्रांति' के माध्यम से एक ऐसे वेनेजुएला का सपना देखा था जो आत्मनिर्भर हो और जिसका तेल संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण हो. चावेज ने अमेरिका को 'शैतान' और 'साम्राज्य' कहकर संबोधित किया था और क्षेत्रीय राजनीति में वाशिंगटन के प्रभाव को कम करने के लिए रूस, चीन और क्यूबा के साथ गहरे संबंध बनाए थे.
निकोलस मादुरो ने इसी विरासत को आगे बढ़ाया, लेकिन उनके कार्यकाल में आर्थिक कुप्रबंधन और अमेरिकी प्रतिबंधों ने देश को 600 प्रतिशत की मुद्रास्फीति और मानवीय संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया.
मादुरो की गिरफ्तारी और उसके बाद डेल्सी रोड्रिग्ज का अमेरिकी बजट नियंत्रण और तेल संसाधनों के बंटवारे पर सहमत होना यह दर्शाता है कि विचारधारा अब 'अस्तित्व' की लड़ाई हार रही है और 'व्यावहारिकता' के सामने घुटने टेक रही है.
विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो चाविस्मो का वर्तमान स्वरूप अपनी वैचारिक शुद्धता खो चुका है. जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी सुरक्षा और सत्ता की निरंतरता के लिए उन्हीं शक्तियों से हाथ मिला लेते हैं जिन्हें वे दशकों से अपना सबसे बड़ा शत्रु बताते रहे, तो जनता के बीच उस विचारधारा की विश्वसनीयता समाप्त हो जाती है.
वेनेजुएला अब लगभग 50 मिलियन बैरल तेल अमेरिका को सौंप चुका है और देश का मासिक बजट वाशिंगटन की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है. यह एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में वेनेजुएला की उस छवि के विपरीत है जिसे चावेज ने गढ़ा था.
ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मादुरो की गिरफ्तारी के साथ ही उस 'कठोर चाविस्मो' का अंत हो गया है जो अमेरिका से टकराने का साहस रखता था.
क्या हूगो चावेज की विचारधारा फिर से वेनेजुएला पर शासन कर पाएगी? इसका उत्तर देश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में छिपा है.
चाविस्मो की वापसी की संभावनाएं इस समय क्षीण दिखाई देती हैं. इसका पहला कारण यह है कि आंदोलन अब नेतृत्व विहीन है. मादुरो के जेल में होने और डेल्सी रोड्रिग्ज के समझौतेवादी रुख ने कट्टरपंथी चाविस्ताओं को दिशाहीन कर दिया है. दूसरा कारण आर्थिक वास्तविकता है. वेनेजुएला के लोग अब वैचारिक नारों से ज्यादा भोजन, साफ पानी और दवाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की तीन-चरणीय योजना, स्थिरीकरण, सुधार और राजनीतिक संक्रमण स्पष्ट रूप से देश को एक पूंजीवादी और अमेरिका-समर्थक ढांचे की ओर धकेल रही है.
हालांकि, चाविस्मो पूरी तरह समाप्त नहीं होगा, बल्कि यह एक सीमित राजनीतिक शक्ति के रूप में जीवित रह सकता है. लैटिन अमेरिका में 'पिंक टाइड' (वामपंथी लहर) का इतिहास रहा है कि विचारधाराएं कभी पूरी तरह नहीं मरतीं, वे बस सुप्त अवस्था में चली जाती हैं.
लेकिन, शासन के रूप में इसकी वापसी के लिए वेनेजुएला को एक ऐसे करिश्माई नेता की आवश्यकता होगी जो चावेज जैसा प्रभावी हो और जो आर्थिक रूप से तबाह हो चुके देश को फिर से खड़ा कर सके.
वर्तमान में, जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू असंतोष बढ़ रहा है, वेनेजुएला का भविष्य चाविस्मो की 'क्रांति' से दूर और एक 'पश्चिमी-सहयोग' वाले लोकतंत्र की ओर मुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. मादुरो का अपहरण इस पूरी प्रक्रिया में अंतिम कील साबित हो सकता है, जो यह संकेत देता है कि अब वेनेजुएला में विचारधारा पर रोटी और कूटनीति हावी हो चुकी है.