क्या क्यूबा में वेनेजुएला के समान सत्ता परिवर्तन संभव है?
नई दिल्ली । डेस्क: हवाना और वाशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान कैरेबियन सागर के इस छोटे से द्वीप की ओर खींच लिया है, जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अधिकतम दबाव' वाली नीति ने क्यूबा को अस्तित्व के संकट में डाल दिया है. ट्रंप के हालिया बयानों और वेनेजुएला व ईरान में अमेरिकी सैन्य सक्रियता के बाद अब यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या क्यूबा में भी वेनेजुएला की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन मुमकिन है.
हालांकि, क्यूबा और वेनेजुएला की राजनीतिक पृष्ठभूमि में जमीन-आसमान का अंतर है. जहां वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में समाजवाद संसदीय चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता में आया था, वहीं क्यूबा में 1959 की क्रांति के दौरान फिदेल कास्त्रो और चे ग्वेरा ने बतिस्ता की तानाशाही के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर सत्ता हासिल की थी.
यही कारण है कि क्यूबा का ढांचा एक अभेद्य सैन्य दुर्ग की तरह है, जिसे केवल बाहरी दबाव से ढहाना ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती होगी. ट्रंप का लक्ष्य क्यूबा की कम्युनिस्ट विचारधारा को जड़ से मिटाना है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि विचारधारा को फौरी तौर पर परास्त करना कठिन है क्योंकि क्यूबा की सेना और अर्थव्यवस्था का 60 प्रतिशत हिस्सा 'जीएईएसए' (GAESA) जैसे सैन्य संगठनों के हाथ में है.
वर्तमान में क्यूबा की स्थिति बेहद नाजुक है. अमेरिकी तेल नाकाबंदी ने द्वीप को अंधेरे में धकेल दिया है और लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. इस माहौल में सत्ता की गलियारों में हलचल तेज है. वर्तमान राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की स्थिति डांवाडोल नजर आ रही है और उनके विकल्प के रूप में तीन प्रमुख नाम चर्चा में हैं.
पहले दावेदार के रूप में ऑस्कर पेरेज-ओलिवा फ्रागा का नाम उभर रहा है, जो वर्तमान में उप-प्रधानमंत्री हैं. वे फिदेल और राउल कास्त्रो के परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें सैन्य तंत्र का पूर्ण समर्थन प्राप्त है.
दूसरे बड़े दावेदार राउल कास्त्रो के पोते राउल गुइलेर्मो रोड्रिगेज कास्त्रो हैं, जिन्हें 'राउलिटो' के नाम से जाना जाता है. वे लंबे समय तक राउल कास्त्रो के सुरक्षा प्रमुख रहे हैं और कहा जाता है कि वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ गुप्त वार्ताओं में मुख्य कड़ी हैं.
तीसरे संभावित नाम रॉबर्टो मोरालेस ओजेदा का है, जो कम्युनिस्ट पार्टी के संगठन सचिव हैं और एक अनुभवी नौकरशाह माने जाते हैं.
सवाल यह भी उठता है कि क्या क्यूबा के ये नेता वेनेजुएला की डेल्सी रोड्रिगेज या अन्य अधिकारियों की तरह पाला बदल सकते हैं. वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज ने सत्ता के भीतर रहकर भी अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के जरिए खुद को सुरक्षित रखने की कला दिखाई है, लेकिन क्यूबा में यह 'पलटी' मारना आसान नहीं होगा क्योंकि यहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी का अनुशासन अत्यधिक कठोर है.
हालांकि, ट्रंप प्रशासन का संकेत है कि यदि क्यूबा के सैन्य नेता डियाज-कानेल को हटाकर सुधारों के लिए राजी होते हैं, तो अमेरिका उन्हें सत्ता में बने रहने की छूट दे सकता है. यह ठीक वैसी ही रणनीति है जैसी वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ अपनाई गई थी, जहाँ नेतृत्व को हटाकर सरकारी ढांचे को बरकरार रखने की कोशिश हुई. लेकिन क्यूबा की सशस्त्र क्रांति की विरासत नेताओं को समझौते से रोकती है.
ट्रंप की तेल किलाबंदी और सैन्य धमकी ने क्यूबा के भीतर असंतोष की आग को तो भड़का दिया है, लेकिन कम्युनिस्ट विचारधारा को परास्त करने के लिए केवल भूख और अंधेरा काफी नहीं होगा. क्यूबा का इतिहास बताता है कि वह दशकों से प्रतिबंधों को झेलने का अभ्यस्त है.
'लांसेट ग्लोबल हेल्थ' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंधों से होने वाली लाखों मौतें भी अक्सर क्यूबा के शासन को और अधिक रक्षात्मक बना देती हैं. अंततः, यदि ट्रंप क्यूबा में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, तो उन्हें न केवल कास्त्रो परिवार के वफादारों को तोडना होगा, बल्कि उस सैन्य-आर्थिक गठजोड़ को भी ध्वस्त करना होगा जो 1950 के दशक के संघर्ष से पैदा हुआ था.
वेनेजुएला की तुलना में क्यूबा की जड़ें कहीं अधिक गहरी और वैचारिक रूप से सशस्त्र संघर्ष से सींची गई हैं, इसलिए यहाँ बदलाव का रास्ता अधिक रक्त रंजित या जटिल हो सकता है.