ईरानी टीम को मैच खत्म होते ही US छोड़ने का आदेश
नई दिल्ली । डेस्क: लॉस एंजिल्स और सिएटल में होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के ग्रुप मैचों के बाद ईरानी फुटबॉल टीम को कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिका छोड़ना होगा. अमेरिकी अधिकारियों ने इस कड़े फैसले की पुष्टि कर दी है, जिसके बाद ईरानी टीम के वीजा और उनके ठहरने के इंतजामों को लेकर विवाद काफी गहरा गया है.
व्हाइट हाउस फीफा टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गियुलियानी ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पहले से तय थी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
यह विवाद तब सामने आया जब लॉस एंजिल्स में खेले गए एक बेहद तनावपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील ग्रुप-जी मैच में ईरान (टीम मेली) ने न्यूजीलैंड के साथ ड्रॉ खेला. वर्तमान में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण इस मैच को लेकर पहले ही अनिश्चितता बनी हुई थी.
मैच खत्म होने के महज कुछ घंटों बाद ही ईरानी दल को रात 8 बजे स्थानीय समय पर अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद वे मेक्सिको स्थित अपने बेस कैंप लौट गए. इस कदम की कड़ी आलोचना हो रही है क्योंकि खिलाड़ियों को मैच के बाद होटल में आराम करने और रिकवरी का समय भी नहीं मिल सका.
ईरान के मुख्य कोच अमीर घालेनोही ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि टीम को उम्मीद थी कि वे कैलिफोर्निया में रात बिताएंगे ताकि खिलाड़ियों की शारीरिक रिकवरी सही ढंग से हो सके, लेकिन उन्हें तुरंत लौटने का आदेश दे दिया गया.
इसके अलावा, ईरान के विंगर मेहदी तोराबी का एंट्री वीजा मैच के बाद समाप्त होने से स्थिति और बिगड़ गई थी, हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बाद में उन्हें नया मल्टीपल-एंट्री वीजा जारी कर इस मुद्दे को सुलझाने का दावा किया.
सुरक्षा और राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए गियुलियानी ने बताया कि ईरान के कुछ सहयोगी स्टाफ और अधिकारियों को देश में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया है. उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान का संदर्भ देते हुए साफ किया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से सीधे संबंध रखने वाले किसी भी व्यक्ति को विश्व कप के बहाने अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.
इस बीच, ईरान के कप्तान मेहदी तरेमी ने सुरक्षा जांच और लंबी यात्रा की कठिनाइयों को साझा करते हुए कहा कि तिजुआना से लॉस एंजिल्स के छोटे से सफर में टीम को पांच घंटे की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा. तरेमी ने इस असहज स्थिति पर दुख जताते हुए कहा कि फीफा को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और उनकी अधिक मदद करनी चाहिए.
बहरहाल, अमेरिकी सरकार के इस सख्त रुख ने खेल के महाकुंभ में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.