ट्रंप के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर लगाई रोक पर, ईरानी मीडिया
तेहरान । डेस्क: तेहरान टाइम्स की खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को अचानक रोके जाने का फैसला वाशिंगटन की उस सैन्य रणनीति की विफलता को दर्शाता है, जिसे वह ईरान पर थोपने की कोशिश कर रहा था. ईरानी मीडिया ने इसे राष्ट्रपति ट्रंप की एक "बनावटी जीत" गढ़ने की कोशिश करार दिया है.
तेहरान के आधिकारिक और सैन्य हलकों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किया गया 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अपने मुख्य उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह नाकाम रहा है. ईरानी विश्लेषणों के मुताबिक, अमेरिका का इरादा ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना और वहां के नेतृत्व को अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर करना था, लेकिन 39 दिनों के भीषण संघर्ष के बाद भी ईरान के रणनीतिक ढांचे और संकल्प में कोई कमी नहीं आई है.
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को निकालने के एक मिशन के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन ईरानी मीडिया इसे अमेरिकी नौसेना की कमजोरी और क्षेत्र में बढ़ते दबाव के परिणाम के रूप में देख रहा है.
ट्रंप का यह दावा कि पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर तथा ईरान के साथ एक 'अंतिम समझौते' की दिशा में प्रगति के कारण मिशन रोका गया है, तेहरान द्वारा एक राजनीतिक पैंतरेबाजी के रूप में देखा जा रहा है.
ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सोमवार को अमेरिकी युद्धपोतों को चेतावनी देने के लिए उन पर फायरिंग की थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण अटूट है.
ईरानी मीडिया ने वाशिंगटन पोस्ट के उस विश्लेषण को भी प्रमुखता से जगह दी है जिसमें उपग्रह चित्रों के जरिए यह खुलासा किया गया कि ईरानी जवाबी हमलों ने मध्य पूर्व में कम से कम 228 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपकरणों को तबाह कर दिया है. ईरानी अखबारों का तर्क है कि अमेरिका ने अपनी सार्वजनिक स्वीकारोक्ति से कहीं अधिक नुकसान झेला है, जिसमें उसके रडार, वायु रक्षा प्रणालियां और सैन्य विमान शामिल हैं.
तेहरान की मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को भी एक हार की स्वीकृति के रूप में पेश किया जा रहा है जिसमें उन्होंने ऑपरेशन के समापन की घोषणा की. वहीं, युद्ध सचिव पीट हेगसेथ द्वारा अमेरिकी स्थिति को "रक्षात्मक" बताना ईरानी मीडिया के लिए इस बात का सबूत है कि वाशिंगटन अब संघर्ष को और अधिक खींचने की स्थिति में नहीं है.
ईरान का मानना है कि ट्रंप केवल घरेलू जनता को शांत करने के लिए सोशल मीडिया पर आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं ताकि वह अपनी गिरती लोकप्रियता और 62 प्रतिशत की ऐतिहासिक अस्वीकृति रेटिंग को संभाल सकें. ईरानी मीडिया ने इसे एक "सम्मानजनक निकास" (Face-saving exit) की तलाश बताया है, क्योंकि अमेरिकी जनता 4.50 डॉलर प्रति गैलन की रिकॉर्ड ईंधन कीमतों से त्रस्त है.
अंततः, ईरानी दृष्टिकोण यह है कि अमेरिका ने यह महसूस कर लिया है कि सैन्य साधनों के माध्यम से ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना असंभव है और होर्मुज की संकरी जलधाराओं में ईरान की संप्रभुता को चुनौती देना वाशिंगटन के लिए भारी पड़ रहा है. 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर लगी यह रोक वास्तव में उस अमेरिकी अभियान का अंत है जो बिना किसी ठोस उपलब्धि के समाप्त हो गया.