ईरान ने कहा अमेरिका में ईमानदारी की कमी, वार्ता की उम्मीद धुंधली
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अल-ज़जीरा के साथ एक विशेष साक्षात्कार के दौरान वैश्विक मंच पर अमेरिका के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच विश्वास का स्तर अब शून्य पर पहुंच चुका है. अराघची ने पुष्टि की कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के सीधे संपर्क में हैं और उन्हें संदेश प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने इन संपर्कों को किसी भी तरह की 'वार्ता' मानने से साफ इनकार कर दिया.
अराघची का यह कड़ा रुख अकारण नहीं है. इसके पीछे अमेरिका द्वारा किया गया वह ऐतिहासिक विश्वासघात है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया. ईरानी विदेश मंत्री ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका में ईमानदारी की भारी कमी है और उनके साथ बातचीत का अनुभव हमेशा कड़वा रहा है.
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब ओमान की मध्यस्थता में दोनों देश परमाणु समझौते को लेकर एक बड़ी सफलता के बेहद करीब थे, ठीक उसी नाजुक मोड़ पर अमेरिका ने ईरान पर हमले किए. जून 2025 और फिर हालिया युद्ध की शुरुआत ने यह साबित कर दिया कि वाशिंगटन एक तरफ कूटनीति का नाटक करता है और दूसरी तरफ सैन्य आक्रमकता दिखाता है.
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और गहरा जख्म वह विश्वासघात है, जब कथित तौर पर बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान ही अमेरिका ने अचानक हमला कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई को निशाना बनाया. ईरान का तर्क है कि जब किसी देश के सर्वोच्च नेतृत्व पर उस वक्त हमला किया जाए जब शांति की राह खोजी जा रही हो, तो ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की कूटनीतिक ईमानदारी की उम्मीद करना बेमानी है.
अराघची ने सवाल उठाया कि एक ऐसा देश जो बातचीत की मेज पर बैठे प्रतिद्वंद्वी की पीठ में छुरा घोंपने की रणनीति रखता हो, उस पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? यही कारण है कि ईरान अब अमेरिका की किसी भी शांति पहल को संदेह की दृष्टि से देख रहा है.
पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देश भले ही सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हों, लेकिन ईरान के लिए अमेरिका का 'धोखेबाज' चेहरा अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है. ईरान का मानना है कि अमेरिका केवल बातचीत का भ्रम फैलाकर अपनी सैन्य रणनीतियों को अंजाम देता है, जैसा कि उसने पिछले नौ महीनों में दो बार हमले करके साबित किया है.
वहीं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग को लेकर भी अराघची ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस जलमार्ग का भविष्य ईरान और ओमान तय करेंगे, न कि कोई बाहरी ताकत. युद्ध की स्थिति को देखते हुए ईरान ने अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र को उन दुश्मनों के लिए बंद कर दिया है जो उनके साथ युद्धरत हैं.
अराघची ने कहा कि यह युद्ध का सामान्य नियम है कि हम अपने शत्रुओं को वाणिज्य के लिए अपनी सीमाओं का उपयोग नहीं करने देंगे.
हालांकि, उन्होंने भारत, चीन और तुर्की जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए मार्ग खुला रखने की बात कही है. दूसरी ओर, पेंटागन द्वारा ईरान पर जमीनी हमले की तैयारियों और खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती तैनाती पर अराघची ने दो-टूक कहा कि ईरान अपनी रक्षा करना बखूबी जानता है.
उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि हम उनका इंतजार कर रहे हैं और यदि उन्होंने जमीनी युद्ध की गलती की, तो उन्हें ईरान की ताकत का ऐसा सामना करना पड़ेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी.
कुल मिलाकर, ईरान के इस रुख ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य आक्रामकता और विश्वासघात की नीति नहीं छोड़ता, तब तक वार्ता की कोई भी उम्मीद केवल एक छलावा ही रहेगी