अमेरिकी पाबंदियों का शिकार ईरान का शिक्षा क्षेत्र
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर लागू किए गए नए कड़े प्रतिबंधों का सबसे भयावह असर वहां की आम जनता और शिक्षा व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है. अमरीका की “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” (आर्थिक डी-डे) नीति के तहत विदेश मंत्रालय और ट्रेजरी विभाग ने ईरान के साथ शैक्षणिक सहयोग से जुड़ी छूटों को अचानक निलंबित कर दिया है. इसके कारण ईरान के बेकसूर छात्रों के आगे अपनी पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय करियर को आगे बढ़ाने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
सामान्य लाइसेंस 'जी' का निलंबन और शैक्षणिक संस्थानों की तालाबंदी
अमेरिका के 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) ने दशकों पुराने 'जनरल लाइसेंस जी' को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है, जो अमरीकी विश्वविद्यालयों और ईरानी शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान और गैर-लाभकारी शिक्षा सेवाओं की अनुमति देता था. इस कदम का सीधा असर यह हुआ है कि वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा के लिए सबसे जरूरी भाषा परीक्षाओं (TOEFL और GRE) का संचालन करने वाली संस्था ETS ने ईरान में अपनी सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है.
पहचान-पत्र पर भी पाबंदी: डुओलिंगो का कड़ा कदम
अंग्रेजी भाषा दक्षता प्रमाणपत्र देने वाली प्रसिद्ध अमेरिकन कंपनी 'डुओलिंगो' (Duolingo) ने ETS से भी सख्त रुख अपनाया है. कंपनी ने ऐलान किया है कि अब केवल ईरान के भीतर ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला कोई भी नागरिक जिसके पास केवल ईरानी पहचान-पत्र (पासपोर्ट या ID) है, वह परीक्षा नहीं दे सकेगा. इसका मतलब यह हुआ कि ईरान से बाहर रह रहे छात्र भी इस टेस्ट प्रक्रिया से पूरी तरह बेदखल कर दिए गए हैं. इसके अलावा, जनवरी में IELTS परीक्षा पर भी ईरान के भीतर रोक लग चुकी थी.
पड़ोसी देशों का खर्चीला सफर या सपनों की बलि: ईरानी युवाओं की बेबसी
इन नए फैसलों ने विदेश जाकर पढ़ाई करने, फेलोशिप पाने या बेहतर रोजगार की तलाश करने का सपना देख रहे युवाओं को हताश कर दिया है. ईरानी मुद्रा रिआल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे छात्रों के लिए अब परीक्षा देने तुर्की या आर्मेनिया जैसे पड़ोसी देशों में जाना आर्थिक रूप से असंभव सा हो गया है. कई विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा ईरानी आवेदकों के पीएचडी आवेदन और स्कॉलरशिप पर भी पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, जिससे छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय राहें लगभग बंद हो गई हैं.
सरकार के खिलाफ पाबंदियां, लेकिन शिकार आम जनता
वाशिंगटन का दावा है कि इन आर्थिक पाबंदियों का उद्देश्य ईरान सरकार और उसकी सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के वित्तीय स्रोतों को सुखाना है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन नए आर्थिक कदमों ने सत्ता के बजाय बेकसूर नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य पर करारी चोट की है. निराशा के माहौल में ईरानी छात्र अब ऑनलाइन अर्जियों और अपीलों के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, हालांकि फिलहाल उनका भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है.